मेरे वंश का दिया

मेरे वंश का दिया

शहर से करीब १२/१३ किलोमीटर दूर था निवारण का घर। निवारण एक साधारण सा ऑटो चालक। अपने छोटे से घर के आंगन में सर्दि के मौसम में धूप का आनंद लेते लेते अतीत के ख्यालों में खो गया….अपनी बिटिया नयनतारा को लेके बहुत सपने है उसके। जहाँ उसके जैसे बाकी ऑटो चलाने वाले सोचते थे अपनी अपनी बिटिया के हाथ कब पीले करेंगे, वहीं निवारण सोचता था एक दिन उसकी लड़की नयनतारा पढ़ाई लिखाई कर के बहत ऊँचे मुकाम पे पहुंचेगी।

नयनतारा निवारण की एकमात्र संतान हैं। नयनतारा के जन्म के कुछ ही दिन बाद निवारण की अर्धांगिनी इस दुनिया की मोह माया को अलविदा केहके चिरनिद्रा में चली जाती है। निवारण और नयनतारा की दादी ही पाल पोष के बड़ा किए उसको। निवारण को तो उसकी अम्मा ने बहत बोला था दूसरे विवाह के लिए, पर निवारण था के हर बार मना कर देता दूसरी शादी से। नयनतारा की परवरिश में कोई कमी कोई खामी ना रहे इसके लिए वो दूसरे शादी का सोचा भी नहीं।

नयनतारा बचपन से ही होशियार थी पढ़ाई लिखाई में। घर के पास वाले सरकारी विद्यालय में पढ़ती थी वो, और घर आके टीचर मैडम की तरह अपने दादी को भी पढ़ाती थी। धीरे धीरे समय बीतता गया और नयनतारा अच्छे अंकों से एच. एस भी पास कर ली। निवारण को कई लोग बोलने लगे के बिटिया बहत पढ़ाई कर ली, अब कोई अच्छा सा लड़का देख के शादी करवा दो बिटिया की, निवारण की माताजी भी यही चाहती थी पर निवारण को कतई मंजूर नहीं था के पढ़ाई छुड़ा कर उसकी शादी कर दी जाए। निवारण के उत्साह से नयनतारा कॉलेज में एडमिशन लेती है।

नयनतारा का ग्रेजुएशन भी हो जाता है। निवारण का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है के उसकी बिटिया ने कालेज की परीक्षा पास कर ली। “बाबूजी….” नयनतारा के बुलाने पर निवारण की तंद्रा टूटी।
“बाबूजी ये लीजिए आपकी दावा, में निकाल रही हूं स्कूल के लिए, आप दवाई लेके खाना खाके आराम कीजिएगा। में शाम को घर आके आपसे खूब बातें करूंगी….”।

नयनतारा ग्रेजुएशन के बाद बी. एड की पढ़ाई की, जैसे बचपन में दादी को पढ़ाती थी, वैसे ही अब टीचर बनके अपने छात्र छात्राओं की पढ़ती है। निवारण ने अब ऑटो चलाना छोड़ दिया। अब पूरे घर की जिम्मेदारी नयनतारा ने अपने कंधो पे ली ली। शादी भी नहीं की, निवारण अभी शादी की बात छेड़ भी दे तो कहती है,”बाबूजी आप भी तो दुबारा शादी नहीं किए, पूरा जीवन अकेले ब्यतित किए, में भी नहीं करूंगी शादी, मुझे भी देखभाल करनी है आपकी, जैसे आपने मेरे भविष्य को संवार ने में इतना मेहनत किए है, में भी अपने बच्चो की भविष्य संवार ने में इतना मेहनत करूंगी, और मेरे बच्चे कौन? मेरे छात्र छात्राएं ही हैं मेरे बच्चे ….”।

-मौलिक व स्वरचित
– Mitali Chakraborty

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