मेरी हिन्दी,मेरी अभिव्यक्ति

मेरी हिन्दी,मेरी अभिव्यक्ति

बात अभी की है 8मार्च ,बेटे के स्कूल में वूमेनस डे के अवसर पर एक प्रतियोगिता रखी गई “सेल्फी काॅम्पीटीशन विद योर चाइल्ड एंड राइट सम वर्ड एबाउट योर रिलेशन”। मैं न ही सेल्फी लेने मे महारथ थी और न ही मुझे अपनी अंग्रेजी  पर इतना भरोसा था कि मै अपनी भावनायें अच्छी तरह व्यक्त कर पाऊंगी।

पर बात बच्चे के भाग लेने की थी ,हर माँ की तरह मैं भी उसे स्कूल के हर कार्य-कलाप मे प्रविष्टी जरूर कराती थी,,पर अब बात मेरे अंग्रेजी में लिखने के ऊपर थी,काफी सोचा और बच्चों की मम्मियों की फोटो और अंग्रेजी में उनके विचार वाहटस अप  स्कूल ग्रुप  में बराबर आ रहे थे,शाम ढलती जा रही थी और समय सीमा बस एक घंटा और बचा था।

मैं तय नही कर पा रही थी कि मैं प्रतियोगिता का हिस्सा बनूँ कि नही फिर मन में विचार आया  कि मैं खुद को जिस भाषा मे सुन्दर तरीके से व्यक्त कर पाऊं मै वही लिखूंगी और भाग जरूर लूंगी। बस मैने एक सेल्फी अपने बच्चे के साथ  ली और हिंदी मे अपनी कुछ लाइने लिखकर ग्रुप मे भेज दी अब तक की मैं अकेली मम्मी थी जिसने हिन्दी मे लिखा था।

खुद को थोड़ा बुरा भी लग रहा था पर सन्तुष्टि थी कि मेरा बच्चा मेरी वजह से पीछे नही रहा।माह के अन्त मे पैरेन्टस टीचर मीटिंग मे गई, रिपोर्ट कार्ड के बाद बच्चे की मैम ने कहा- आपने नीचे फ्लैस बोर्ड देखा!!मैने कहा नही मैम मैने ध्यान नही दिया तब उन्होने कहा “यू गाॅट फर्स्ट पोजीशन इन द कॉम्पटीशन हैल्ड ऑन वूमेन्स डे”!! मेरे लिये सच में अप्रत्याशित था आजकल के इंगलिश मीडियम स्कूल मे मेरी हिन्दी में अभिव्यिक्त को पूणर्तः सम्मान मिला,मुझे अपने लेखन पर सच में गर्व महसूस हुआ। 


दोस्तों भाषा एक माध्यम है अपने विचारों कों सरल और सुलभ तरीके से दूसरों के समक्ष प्रकट करने का,,,भाषा भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम है।हम जिस देश में,प्रान्त में ,परिवेश में जन्म लेते हैं वहीं की सभ्यता,विचार,भाषा हम स्वतः सीख लेते हैं।एक बच्चा जब बोलना शुरू करता है वह भी स्वर ही निकालता है ,,भाषा धीरे- धीरे उसे हम सिखाते हैं ।दोस्तों हम “हिन्दुस्तानी” हैं हमारे विचारों को अभिव्यक्त करने की जननी है हमारी ‘हिन्दी’ तो मुझे नही लगता कि कहीं भी इसे बोलने में ,लिखने में हमे खुद को पिछड़ा या छोटा महसूस करना चाहिये।ज्ञान जितना विस्तृत हो उतना अच्छा है।चूंकि हमारा देश बहुभाषी है इसलिये अंग्रेजी एक प्रचलित माध्यम है सभी राज्यों में खुद को व्यक्त करने का लेकिन जैसे अंग्रेजी बोलने और लिखने में हम खुद को पढ़ा -लिखा और बहुत बड़ा महसूस करते हैं वैसे ही हमें अपनी विरासत हिन्दी भाषा पर पूणर्तः गर्व और अभिमान करना चाहिये।

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