न उम्र की सीमा हो

न उम्र की सीमा हो

"इश्क आईने में उम्र नहीं देखता माहताब की आँखों में प्यार देखता है, जब होता है इश्क बेशुमार तो कुछ और नहीं दिखता सिर्फ़ सोच का संगम दिखता है"


प्यार इश्क मोहब्बत कब कहाँ किसके साथ हो जाए कह नहीं सकते। सब्ज़ी तो है नहीं, जो तोल मोल के खरीदा जाए। जिनकी हथेली में उष्मा महसूस होती है, प्यार करने वाले उस हथेली पर घरोंदा बना लेते है। तो क्या गलत है?


समाज में एक आम धारणा है कि शादी के वक्त, या स्त्री और पुरुष को रिश्ता बनाते वक्त महिला की उम्र पुरुष से कम होनी चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जब किसी शादी में लड़की की उम्र लड़के से ज़्यादा हो जाती है तो क्या वे समाज के बनाए नियम के विपरीत जा रहे होते है? हरगिज़ नहीं, सोच विचार करके बनाए गए रिश्ते में गलत तार जुड़ जाए इससे बेहतर है पहली नज़र के प्यार से शिद्दत से जुड़ जाए।

आजकल की पीढ़ी के लिए उम्र हरगिज़ मायने नहीं रखती। अगर दो लोगों की सोच मिलती है, एक दूसरे के साथ सहज महसूस करते है, और एक दूसरे को शिद्दत से चाहते है तो चार लोग क्या कहेंगे, ज़माना क्या सोचेगा उसकी परवाह नहीं करते। प्यार करने वाले यही सोचते है कि अपनी ज़िंदगी हमें कैसे और किसके साथ बितानी है वो हम तय करेंगे, जैसे छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी नये दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी। उम्र में क्या रखा है महज़ अंक ही तो है।


पर समाज की सोच आज भी अठारहवीं सदी वाली ही है। हज़म नहीं होता ये परिवर्तन। उसमें भी दो राय अगर बड़ी उम्र का मर्द अपनी बेटी की उम्र वाली लड़की से इश्क फ़रमाता है, या शादी करता है तो उतनी हाय तौबा नहीं होती, जितनी बड़ी उम्र की औरत अपने से कम उम्र के लड़के के साथ प्यार का रिश्ता बनाती है। इतना भेदभाव क्यूँ? औरत के लिए ही सारी बंदीशें और रवायतों का पर्वत खड़ा कर दिया जाता है मर्द को मनमानी करने का पूरा हक।


बोलीवुड में आज कई कपल्स ऐसे है जिसमें औरत बड़ी, लड़का छोटा। जैसे की प्रियंका-निक जोन्स, ऐश्वर्या राय बच्चन-अभिषेक बच्चन, बिपाशा बसु-करन ग्रोवर, सोसाइटी अली ख़ान-कुणाल खेमे, फ़राह खान-शिरिष कुंदर, अंजली तेंदुलकर-सचीन तेंदुलकर और हाल ही में जिसकी शादी हुई कैटरीना कैफ और विकी कौशल। इन सारी जोड़ियों में लड़कियां बड़ी है, पर सबसे ज़्यादा ट्रोल होती है वो जोड़ी है "मलाइका अरोड़ा खान-अर्जुन कपूर" क्यूँकि शायद उन्होंने शादी नहीं की इसलिए। जब अर्जुन कपूर को मलाइका की उम्र से कोई फ़र्क नहीं पडता तो लोग क्यूँ इतने तिलमिला रहे है। फेसबुक पर जब कहीं इन दोनों के बारे में कुछ छपता है तो कितनी गंदी बातें लोग लिखने लगते है।

अब बात करें उन जोड़ियों की जिसने अपनी बेटी की उम्र वाली लड़की से शादी की सैफ अली खान-करीना

दिलीप कुमार-सायरा बानो मान्यता दत्त-संजय दत्त, शाहिद कपूर -मीरा राजपूत, मिलिंद सोमण-अंकिता कंवर इनकी चर्चा तो कभी नहीं हुई हाँ भाई ये तो मर्द है कुछ भी करने का हक है न।


आख़िर क्यूँ लोग दूसरे लोगों की ज़िंदगी में इतनी दखल देता है?


अगर इन सबको अपने-अपने पार्टनर की उम्र के साथ कोई लेना-देना नहीं है, एक दूसरे के साथ खुशी-खुशी भरपूर ज़िंदगी बिता रहे है तो समाज को कोई हक नहीं बनता इनकी निज़ी ज़िंदगी में दखल देकर जीना मुहाल कर दें। सेलिब्रेटी है तो क्या लोगों की पसंद के मुताबिक ज़िंदगी जिएंगे, उनकी अपनी चोईस है जिसके भी साथ बिताए। आप अपनी निज़ी ज़िंदगी में क्या करते है किसके साथ रहते है ये जानने के ये सब आते है? और अगर आपकी हर छोटी बड़ी बात पर समाज आपको ट्रोलिंग करता है तो बरदाश्त होगा? तो समझो, जिओ और जीने दो कथन को अपना कर शांति से उन प्यार करने वालों को बख़्श दो यार। समाज में चर्चा करने के लिए ओर बहुत सारे मुद्दे है उस पर ध्यान दो। क्यूँकि "ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखें केवल मन" तो इस नई रीत को अमर होने दो।


भावना ठाकर \"भावु\" (बेंगुलूरु, कर्नाटक)

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