नारी

नारी

नारी से सृजित है ये संसार सारा

प्रकृति के कण कण में शक्ति बनकर समाई है

कभी शीतल कभी निर्मल तो कभी पावन है वो

और कभी तेज लौ सी जगमगाई है

है तितली जैसी चंचल वो, लहरों जैसी बलखाती है

तो कभी शांत एक मीठी सरगम सी लोरी दिल को सुकून दे जाती है

देकर साथ हमराही का हर सफर को उसने सँवारा है

बहू बेटी बहन माँ हर रिश्ते को प्यार से निखारा है

जब भी परखा है जग ने उसे किसी कसौटी में उतारकर

हुई सफल हर बार ही वो ना रुकी वो कभी भी चोट खाकर

आए जो आँच परिवार पर तो अपने आँचल में समेट लेगी

पर छेड़ा जो उसका मान किसी ने तो रौद्र रूप भी धर लेगी

अबला नही सबल है, कमजोर नही सशक्त है

ये नारी है

ये वो नींव है जिसके भरोसे टिका हर दरख़्त है

©मनप्रीत मखीजा

What's Your Reaction?

like
1
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0