नींबू पानी बेचा पर हिम्मत नहीं हारी।

नींबू पानी बेचा पर हिम्मत नहीं हारी।

महिलाएँ ठान ले तो किसी से कम नहीं,बस हमें खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। केरल के तिरुवंतपुरम में रहने वाली 31 वर्षीय एनी शिवा ने दूरस्थ शिक्षा से पढ़ाई कर सब इंस्पेक्टर (पुलिस में अधिकारी) बनकर एक मिसाल पेश की है।वैसे तो आपने पहले भी कामयाबी के कई किस्से सुने होंगे | लेकिन एनी की कहानी किसी फिल्मी कहानी से बिल्कुल भी कम नहीं लगती हैं |


वे आजकल काफी चर्चाओं में है |इनका चर्चा में आने का कारण केवल यह नहीं है, कि इन्होंने 31 वर्ष की उम्र में सब इंस्पेक्टर के पद को संभाला है, इसी के साथ साथ एक और वजह भी है, जिनसे इनकी कहानी खूब चर्चाओं में है |

एनी जब कॉलेज में पढ़ती थी, तो उन्हें किसी लड़के से प्रेम हो गया था, परंतु उनके घर वालों ने उस लड़के के साथ शादी ना कर के किसी दूसरे लड़के के साथ एनी की शादी करा दी |शादी के बाद एनी को एक बेटा हुआ |


एनी 21 वर्ष की थी तो वह अपने पति से अलग हो गई और अलग रहने लगी | उनके माता-पिता ने भी उन्हें अपने पास रखने से मना कर दिया, क्योंकि उनके पास 8 महीने का एक बच्चा था | इसके बाद उनकी जिंदगी काफी संघर्ष भरी गुजरी | एनी ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने अपने पति का घर छोड़ा तो वह महज 21 वर्ष की थी और उनके मां-बाप ने भी उनका साथ छोड़ दिया था |


उन्हें किराए के मकान में रहना पड़ा था |एनी ने बताया कि पहले तो उन्हें बहुत वर्षों तक लोग अपना मकान रहने के लिए किराए पर नहीं देते थे, क्योंकि वह सिंगल मदर थी | इतना होने के पश्चात भी उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी | अपने घर का खर्च चलाने के लिए वे घर-घर जाकर सामान बेचती थी एवं तीज त्यौहार के मौके पर फेस्टिवल ग्राउंड में आइसक्रीम एवं नींबू पानी का ठेला भी लगाया करती थी |नींबू पानी एवं आइसक्रीम बेचने के साथ-साथ उन्होंने बैंक की पॉलिसी बिकवाने का भी कार्य किया | एनी को काफी बुरे दौर से गुजरना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी पढ़ाई को नहीं छोड़ा |


एनी ने बताया, कि उन्हें एक रिश्तेदार ने पुलिस की तैयारी करने का सुझाव दिया इसीलिए एनी ने पुलिस की तैयारी शुरू कर दी | 2016 में एनी की मेहनत रंग लाई और उनका चयन केरल पुलिस में बतौर सब-इंस्पेक्टर के पद पर हो गया | उन्होंने कहा कि उनके चयन के लिए उनके रिश्तेदार काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि उन्होंने एनी को पढ़ाई करने के लिए काफी मदद करी और उन्हें उधार पैसे भी दिए ताकि वह अपनी पढ़ाई जारी रख सके | 2016 में एनी को जब पहली बार सफलता मिली तो वह बहुत ज्यादा खुश हुई और डेढ़ वर्ष की ट्रेनिंग के पश्चात उन्हें शनिवार के दिन वरकला थाने में प्रोबेशनरी सब इंस्पेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया |


एनी ने कहा कि मैं एक आईपीएस अधिकारी बनूँ यह मेरे माताजी का सपना था जिसे मैंने अपनी मेहनत और लगन से आज पूरा कर दिया है | माता पिता के सपने को पूरा करने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है, और माता पिता के इस सपने ने ही मुझे मेहनत करने के लिए हमेशा प्रेरित किया | एनी ने यह कहा कि हमें कभी भी अपनी परिस्थितियों पर रोना नहीं चाहिए। हमें मेहनत करनी चाहिए क्योंकि रोने से कोई फायदा नहीं होता है | जब तक हम खुद नहीं मान लेते कि हम हार गए हैं, तब तक दुनिया का कोई व्यक्ति हमें हरा नहीं सकता |





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