नेग के कंगन !!

नेग के कंगन !!

शादी हुई थी मेरी ,मेरे पसंद से ,वो भी दीदी के देवर से इसलिए मेरे बारे में सब दीदी के ससुराल वाले जानते थे की मुझे खाना बनाना नही आता हैं ।


पर जब सारे रिश्तेदारों के सामने हलवा बनाने की बारी आई ,तो सासु माँ ने मेरी दीदी और इनको सब को कहा "कोई अभी उसकी हेल्प नही करेगा ,जैसा भी बनाएगी हम सब खा लेंगे आख़िर अब से घर इसका हैं तो ये रसोई भी इसकी हैं । चलो सब जाओ यँहा से ..."


और मुझसे कहा जाओ बनाओ हलवा बनाओ बेसन ये है ,शक्कर ये रहा देशी घी समझ गई ना ....मैने हाँ में सिर हिलाया माँ ने थोड़ा बहुत सिखाया था । खैर कड़ाही ज़्यादा गरम हो गईं।


डरते डरते घी डाला खूब सारा डल गया और तेज धुआँ उठा मैं डर गईं । पर फ़िर भी बेवक़ूफ़ की तरह गैस सीम नही की अब क्या बेसन तो डाल दिया पलटा से चलाना शुरू किया ..एक तो हाथों में ढेर सारी चूड़ियाँ भारी साड़ी ऊपर से नही समझ में आ रहा ये जो हलवा ।जी चाह रहा था की भाग जाऊँ कही .. हे भगवान ये शादी ही क्यूँ की ...


अब जब पलटा से बेसन चला रही थी ,तो कभी एक तरफ़ का बेसन जलने लगे अब बेसन की जलने की ख़ुशबू आने लगी , देखा तो कड़ाही में थोड़ा सा बेसन लग गया था जो जल रहा था ।बेसन जल रहा था और मैं रो रही थी । 


दीदी दुर से देख रही थी । मुझे रोता देख कर उसने सासु माँ से बोला "मम्मी जी वो रो रही हैं मैं जाऊँ क्या ?"


मम्मी जी ने कहा "ख़बरदार कोई नही जाएगा " पर ये क्या !वो खुद चुपके से रसोई में आई फटाफट दूसरी कड़ाही में हलवा बनाने लगी  मैने कहा मम्मी जी आप ! बोली बस !अब तुम प्लेट में सजा कर लाना । 


फूफा जी ,मौसा जी ,सब इंतज़ार बैठे हैं नई बहु के हाथ का हलवा खाने और हाँ उस कड़ाही को उधर ढक कर रख दो बाद में देख लेंगे । फ़िर क्या जान में जान आई । 


कितने प्यार से शर्माते हुए नई दुल्हन अपने नाज़ुक हाथों से सबको हलवा खिलाई । खूब नेग मिले ... सासु माँ ने नेग में सोने की कंगन मुझे पहना दिया  मैने कहा मम्मी ये क्या ??मम्मी मैने तो .... उन्होंने ज़ोर से कहा मिनी बहुत स्वादिष्ट हलवा बनाई हो ये नेग तो बनता हैं।।


बस !ये राज मेरे और सासु माँ में रह जाता अगर झाँक कर इन्होंने ने ना देखा होता । ये इतना ही बोले "वाह !माँ आपकी बहु तो अभी से आपके जैसा हलवा बना दी , ग़ज़ब !" मैं मुस्करा रही थी ... पर राज छुपा रही थी ।


आज तीस साल हो गए मेरी शादी को अब तो पाक कला में निपुण हो गई हूँ । पर फ़िर भी उस दिन जैसा बेहतरीन हलवा कभी भी ना बना पाई !!!!!????????????????


बस !सासु माँ के लिए यही मन से गाती हूँ सौ सौ साल जीये हमारी सासु जी मुझको लागे माँ से प्यारी सासु जी !!!!!!

ये थी मेरी ससुराल की पहली रसोई ... आज भी वो कंगन मेरे हाथों में खनकता हैं आशीर्वाद माँ का साथ जो रहता हैं ।।


कैसी लगी मुझे बताएगा ज़रूर 


आपकी 

अल्पना !!!!

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