नग्मों की साँसें रुक गई आज सरगम देखो अनाथ हो गई!

नग्मों की साँसें रुक गई आज सरगम देखो अनाथ हो गई!

"विलक्षण प्रतिभा लता जी को शत-शत नमन सह श्रद्धांजलि"

"गूँजती थी हर दिल में जो धड़कन बनकर वो शांत हो गई, नग्मों की साँसें रुक गई आज सरगम देखो अनाथ हो गई"

आज 92 साल की लता मंगेशकर का निधन हो गया है। 6 फरवरी को लेजेंड्री गायिका ने मुंबई की ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली उसके साथ ही संगीत की दुनिया का एक स्वर्णिम युग समाप्त हो गया। सालों से कई गायिकाएं आई गई पर उन गायिकाओं में लता जी के इर्दगिर्द भी कोई नजर नहीं आता। वो कानों में मिश्री सा मीठा रस घोलती आवाज़ आने वाली कई सदियों तक कायनात में गूँजती रहेगी।

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर 1929 को इन्दौर में हुआ जो कि अब मध्यप्रदेश में स्थित है। वे पंडित दीनानाथ मंगेशकर और शेवंती की बड़ी बेटी हैं।

लता जी के जन्म के समय उनका नाम हेमा रखा गया था जिसे बदल कर लता कर दिया गया। यह नाम दीनानाथ को अपने नाटक \"भावबंधन\" के एक महिला किरदार लतिका के नाम से सूझा।

बचपन से ही लता जी को घर में गीत-संगीत और कला का माहौल मिला और वे उसी ओर आकर्षित हुईं। पांच वर्ष की उम्र से ही लता को उनके पिता संगीत का पाठ पढ़ाने लगे।

1942 में लता मंगेशकर पर मुसीबत का पहाड़ टूट गया। उनके पिता की जब मृत्यु हुई तब लता जी मात्र 13 वर्ष की थी। लता जी पर परिवार का बोझ आ गया। नवयुग चित्रपट मूवी कंपनी के मालिक मास्टर विनायक, मंगेशकर परिवार के नजदीकी लोगों ने लता का करियर गायिका और अभिनेत्री के रूप में संवारने के लिए मदद की।

1945 में लता मंगेशकर मुंबई शिफ्ट हो गईं और इसके बाद उनका करियर आकार लेने लगा।

लता जी जब पार्श्वगायन के क्षेत्र में अपना करियर बना रही थी तब नूरजहां, शमशाद बेगम जैसी गायिकाओं का ज़माना था। लता जी पर भी इन गायिकाओं का प्रभाव था और वे उसी शैली में गाती थीं। लता समझ गईं कि यदि उन्हें आगे बढ़ना है तो अपनी शैली विकसित करनी होगी और उन्होंने यही किया। उन्होंने हिंदी और उर्दू के उच्चारण सीखे।

उनको पहली कामयाबी मिली 1949 में रिलीज हुई फ़िल्म \"महल\" से। इसमें खेमचंद प्रकाश ने लता जी से \"आएगा आने वाला\" गीत गवाया जिसे मधुबाला पर फिल्माया गया था। यह गीत सुपरहिट रहा। इस गीत ने लता जी की ओर से एक तरह से आगाज़ कर दिया की मैं आ गई हूँ। इस गीत की कामयाबी के बाद लता जी ने फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

कल्याणजी-आनंद जी अनिल बिस्वास, शंकर जयकिशन, सचिनदेव बर्मन, नौशाद, हुस्नलाल भगतराम, सी. रामचंद्र, सलिल चौधरी, सज्जाद-हुसैन, वसंत देसाई, मदन मोहन, खय्याम, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, राहुल देव बर्मन जैसे नामी संगीतकारों की लता मंगेशकर पहली पसंद थी।

1970 में फिल्म संगीत डावाँडोल हो रहा था, लेकिन लता जी के गाने में एक अंदाज़ होता था इसलिए सफलता के शीर्ष पर वह बनी रहीं।

उन्होंने पाकीज़ा, प्रेम पुजारी, अभिमान, हंसते जख्म, हीर रांझा, अमर प्रेम, कटी पतंग, आंधी, मौसम, लैला मजनूं, दिल की राहें, सत्यम शिवम सुंदरम जैसी कई फिल्मों में यादगार गीत गाए।

सिलसिला, चांदनी, कर्ज, एक दूजे के लिए, आसपास, अर्पण, नसीब, क्रांति, संजोग, मेरी जंग, राम लखन, रॉकी, फिर वही रात, अगर तुम न होते, बड़े दिल वाला, मासूम, सागर, मैंने प्यार किया, बेताब, लव स्टोरी, राम तेरी गंगा मैली जैसी सैकड़ों फिल्म में लता जी के आए नग्में हर ज़ुबाँ की पसंद बनें।

अपने सौम्य स्वभाव के चलते लताजी तमाम फिल्म निर्माता, निर्देशक, संगीतकार, गायक, हीरो, हीरोइनों से उनके पारिवारिक रिश्ते रहे। दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद, अमिताभ बच्चन, यश चोपड़ा, राहुलदेव बर्मन, मुकेश, किशोर कुमार से उनके घनिष्ठ संबंध रहे।

लता मंगेशकर की शादी नहीं की। बचपन से ही परिवार का बोझ उन्हें उठाना पड़ा। इस दुनियादारी में वे इतना उलझ गईं कि शादी के बारे में उन्हें सोचने की फुर्सत ही नहीं मिली।

सुना जाता है कि संगीतकार सी. रामचंद्र ने लता मंगेशकर के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था, लेकिन लता जी ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि लता ने इस बारे में कभी खुल कर नहीं कहा, परंतु बताया जाता है कि सी. रामचंद्र के व्यक्तित्व से लता बहुत प्रभावित थीं और उन्हें पसंद भी करती थीं।

उनको मिले प्रमुख सम्मान और पुरस्कार की बात करें तो शायद पन्नें कम पड़े पर प्रमुख सम्मान कुछ इस प्रकार है..

1969 - पद्म भूषण

1989 - दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

1999 - पद्म विभूषण

2001 - भारत रत्न

1972 - फिल्म परी के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

1974 - फ़िल्म कोरा कागज़ के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार

1990 - फिल्म लेकिन के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

इनके अलावा ढेर सारे पुरस्कार, सम्मान और ट्रॉफियां जिनको टांकने बैठेंगे तो स्याही ख़त्म हो जाए। मध्यप्रदेश सरकार ने लता मंगेशकर के नाम पर पुरस्कार भी स्थापित किया है।

"गुम हो गया आज एक नाम आसमान की वादियों में तो क्या हुआ ज़माना सदियों तक याद करेगा उस आवाज़ को, जब-जब माँ सरस्वती के चरणों में सर झुकाएगा"

लता मंगेशकर जैसी विलक्षण प्रतिभा को अश्रु सभर हार्दिक श्रद्धांजलि।

भावना ठाकर \"भावु\" (बेंगलूरु, कर्नाटक)

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