नई तकनीक एग फ़्रिज़िंग

नई तकनीक एग फ़्रिज़िंग

सच में वैज्ञानिक तरक्की कुछ करियर ओरिएंटल लड़कीयों के लिए वरदान साबित हो रही है, आज एक 35 साल की लड़की को ये कहते सुना की मैंने अपने बेबी प्लानिंग के लिए करीब पांच साल पहले ही 30 साल की उम्र में अपने एग फ्रीज़ करवा दिये थे। और अब मुझे बच्चे के जन्म को ले कर कोई जल्दबाजी नहीं है। लेट शादी करने के कारण मैं फिलहाल अपने पति के साथ शादीशुदा जिंदगी के खूबसूरत पलों को खुल कर जी रही हूँ और एन्जॉय कर रही हूँ। अपने एग को एक अस्पताल में फ्रीज़ करवाने के बाद वो मानसिक रूप से आजाद हैं।

आज कल ऐसे मामले काफ़ी देखने को मिल रहे है जहाँ महिलाये लेट बच्चे प्लान करती है जिनसे क्रोमोसोमल अब्नोर्मिलिटी, मिसकैरेज, बच्चे में जन्म से परेशानी के साथ अन्य कई शारीरिक परेशानी भी होती है। ऐसे में अपने जवान और स्वस्थ एग को भविष्य के लिये फ्रीज़ करवाना एक नये विकल्प के रूप में अपनाना बेहतर होगा।

अंडे या एग फ्रीज़ करवाने को मेडिकल टर्म्स में औसाइट क्रायोप्रेजर्वेशन भी कहा जाता है। ये प्रक्रिया महिला के माँ बनने की क्षमता को संरक्षित करने का तरीका है। जिसमें महिला के स्वस्थ और जवान एग को एक वैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा निकाल लिया जाता है और लैब में फ्रीज़ कर दिया जाता है।

एक बार में कम से कम पंद्रह एग लिये जा सकते है। किसी भी महिला के लिये गर्भधारण के लिये 20 साल से 30 साल की उम्र सबसे अच्छी होती है इस समय में एग ज्यादा स्वस्थ होते है, ऐसे में इनको फ्रीज़ करवाना सबसे उचित होता है। इस प्रक्रिया में कई मामलों में कोई बड़ा साइड इफ़ेक्ट नहीं होता, थोड़े मूड स्विंग और कुछ दिनों का आराम डॉक्टर कहते हैं। महिला को जब माँ बनने की इच्छा होती है, तब इन एग को पिघला कर स्पर्म के साथ लैब में मिला महिला के गर्भ में डाल दिया जाता है।

एग फ्रीज़ करने का ये तरीका महिलाओं में अपने कॅरियर और फॅमिली लाइफ में बैलेंस करने का एक बेहतरीन प्रयास है। महिलायें खुल कर अपना जीवन जी सकती हैं। आजकल देखा जा रहा है कि कई बार महिलायें अपने कॅरियर में बिजी होने के कारण माँ बनने में जल्दबाजी नहीं करना चाहतीं और देर करने से माँ बनने की स्वाभाविक उम्र भी निकल जाती है। ऐसे में अपने एग को फ्रीज़ करवा वो निश्चिंत हो जाती है की उम्र ज्यादा होने पे भी उनके पास स्वस्थ और गुण वाले एग होंगे और वो माँ बन पायेंगी, क्यूंकि उम्र बढ़ने के साथ स्वाभविक माँ बनना मुश्किल हो जाता है।

अंदाज़ीत खर्च देखें तो इसमें दो प्रकार की कीमत है। एग्स को महिला से निकालने और उन्हें फ्रीज करने की पूरी प्रक्रिया की कीमत 50 हजार से 1 लाख रुपए के बीच पूरी हो सकती है। यह प्रॉसेस आईवीएफ की तरह ही है। एक बार जब एग फ्रीज हो जाते हैं तो उन्हें फ्रोजन स्टेट में रखने की कीमत 15 हजार से 30 हजार रुपए सलाना हो सकती है।

फिर भी जैसे हर चीज़ के दो पहलू होते है वैसे इस प्रक्रिया में भी थोड़ा बहुत रिस्क तो है ही। हार्मोनल इंजेक्शन के असर से ओएचएसएस का ख़तरा रहता है जिससे पेटदर्द और मितली आ सकती है। और कई केस में ये भी देखा जाता है कि कई बार फ्रीज़ किये गए एग उपयोग के समय जिन्दा नहीं रहते या स्वस्थ नहीं होते ऐसे में ये एग किसी काम के नहीं रहते। साथ ही महिला के स्वाभाविक रूप से माँ बनने की उम्र भी निकल चुकी होती है।

वैसे यह प्रक्रिया नई है, इसलिए इससे जुड़े जोखिमों पर ज़्यादा सर्च नहीं हुआ है। लेकिन डाॅक्टर की मानें तो एग फ्रीजिंग से प्रेग्नेंसी में उतनी ही कॉम्पिलेकशन आ सकती है जितना की आईवीएफ की किसी भी अन्य तकनीक में। वैसे यह बात साफ नहीं है कि यह कॉम्पिलेक्शन प्रक्रिया की वजह से आती है या फिर आईवीएफ करवाने वाले कपल में खुद ही किसी तरह की कॉम्पिलेक्शन्स होती है। ऐसे में विशेषज्ञ डाॅक्टर से मशवरा करके इस प्रोसेस के बारे में सही जानकारी लेकर ही अपनाना बेहतर रहेगा। अगर डाॅक्टर इस प्रोसेस को सही मानते है तो महिलाओं के लिए किसी भी उम्र में माँ बनना आसान रहेगा।


(भावना ठाकर, बेंगुलू

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