नारी हो तो अपनी परछाई पर भी भरोसा मत करो।

नारी हो तो अपनी परछाई पर भी भरोसा मत करो।

गर्मी की छुट्टियां होते ही सब बच्चे खुश हो जाते,कि अब तो नानी या दादी के घर जाने को मिलेगा। क्योंकि नौकरी के चलते दूसरे शहरों में रहना मजबूरी थी। होली - दीवाली की छुट्टियां कम दिनों की ही होती थीं,अतः उनमें जाना संभव ना हो पाता। 


राशि और रूपाली बुआ भतीजी थीं। रूपाली अपने भाई - भाभी के साथ पढ़ाई करने के लिए आ गयी थी। राशि और रुपाली में वैसे तो तीन वर्षों का अंतराल था,पर आपस में खूब पटरी खाती। दोनों एक दूसरे की महीन से महीन बात जानती थीं। 


घर में सब बैठकर मंत्रणा कर रहे थे कि कहां जाना है। नानी के घर या दादी के। रूपाली ज्यादा जोर घर कालने पर दे रही थी,ताकि मम्मी पापा से मिल सके। वहीं राशि का मन नाना के घर में अटका था क्योंकि वहां मौसी और मामा के बच्चे भी मिल जाते थे और खूब धमाल मचाते थे।


अंत में फैसला हो गया कि पहले नाना के घर चलेंगे,फिर दादी के पास। अब सब खुश थे। रूपाली भी अपनी भाभी के मायके जाती रहती थी,अतः उसे कोई एतराज नहीं हुआ। और सब पहुंच गए नानी के घर।रुपाली पंद्रह और राशि ग्यारह वर्ष की थीं। कुछ दिन वहां रुककर राशि की माँ अपनी ससुराल की तरफ रवाना हुई।

वहां राशि के एक चचेरे चाचा भी आये हुए थे...यूँ कहिए कि वहीं रह रहे थे। करीब पचास वर्ष की अवस्था रही होगी।


राशि जब भी उनको कुछ खाने पीने का सामान देने कमरे में जाती, तो वो उसको अपनी गोद मे बैठा लेते,पीठ पर हाथ फेरते,तो कभी गाल पकड़ कर नोचते। राशि को अच्छा तो नहीं लगता,लेकिन वो उनको पिता समान ही समझती,तो सब उनका स्नेह समझ,सब सामान्य समझती।


एक दिन राशि की मां,दादी व रूपाली पास में रहने वाली बुआ के यहां गए थे। राशि का मन नहीं था,अतः वो नहीं गयी थी। सब लोगों को गए एक घंटा हो गया था। ईस बीच जाने किस काम से वो चचेरे चाचा आये और राशि को अकेला देख,वहीं बैठ गए। वो कभी उसकी पीठ सहलाते,कभी हाथ....करते करते उनका हाथ राशि के वक्ष तक जा पहुंचा। राशि उनका हाथ हटाने की चेष्टा करने लगी,लेकिन कुछ न कर पाई। तभी संयोग से रूपाली वहां आ पहुंची,उसका राशि बिन वहां मन नहीँ लग रहा था...उसे देख राशि चीख कर रो पड़ी...चाचा तो दबे पांव जाने कहाँ गायब हो गए।


उस दिन से,राशि,रूपाली और उसकी मां ने ये सबक ले लिया,कि चाहे कितना सगा रिश्ता क्यों न हो,बच्ची चाहे तीन साल की ही बच्ची क्यों न हो.....अपनी परछाई पर भी भरोसा करना उचित नहीं।


#मेरी जिंदगी के सबक,


What's Your Reaction?

like
6
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
1
wow
0