नारी की अनदेखी छवि

नारी की अनदेखी छवि

सतयुग में नारी की छवि,

देवी जैसी पूजी जाती थी,

रहती थी घर मे वह,

घर की लक्ष्मी कही जाती थी….

जब कलयुग ने ,

अपना रूप दिखाया है,

नारी का अस्तित्व खतरे मे आया है,

तब नारी ने अपना

 विकराल स्वरूप दिखाया है

सतयुग मे नारी की छवि……

हाथ मे अपने ले,

स्वयं सुरक्षा शस्त्र को,

अपना मान बचाया है,

हर क्षेत्र चुनौती से लड़कर, 

अपना मान बढ़ाया है,

सतयुग नारी की छवि….

है खलिस सबके मन मे,

नारी के दृढ़संकल्प को लेकर,

कैसे अपने को नही टूटने देती है,

मर्यादा मे रहकर हर क्षेत्र विजय होती है,

सतयुग मे नारी की छवि……

सुने है ताने सबके उसने,

सबने उसको ही कोसा,

पर थी अडिग रही,

वह अपने पथ पर ,

न वह घबराई है,

तब नारी कहलायी है,

#दपिंककामरेड

स्वरचित 

Nandini ( Kanpur)

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