निर्णय

निर्णय

स्त्रियों को पुरुषवादी सोच से आज़ादी मिलनी ही चाहिये..क्यों स्त्री घर मे कैद रहे..क्यों स्त्री केवल घर के काम ही करे…क्यों स्त्री का पुरुष अपमान करे… क्या स्त्री और पुरुष में दोस्ती नहीं हो सकती है..” सुधीर महिला दिवस पर भाषण दे रहा था।पूरा हॉल तालियों से गूंज रहा था।सुधीर एक ऐसे एनजीओ में काम करता था जो महिलाओं के लिए धरातल पर रहकर कार्य करता था।

आज महिला दिवस पर सुधीर को भी बोलने का मौका मिला था।तभी मीनाक्षी बोल उठी “यार अगर ऐसी सोच वाला हमसफ़र मिल जाय तो अपना जीवन सफल हो जाये..सुन निधि पता तो करना क्या इसकी कोई गर्लफ्रैंड तो नहीं..” “अरे नहीं रे तुम्हें अभी एनजीओ जॉइन करे सिर्फ एक महीना हुआ है..इसलिये तुम नहीं जानती उसे..वो बहुत ही शरीफ है..लड़कियों को जल्दी घास नहीं डालता.” “प्लीज निधि मुझे उस से मिलाओ ना.. बाकी मैं सम्हाल लुँगी..”.”हाय सुधीर ..बहुत ही अच्छा बोला आपने आज..इनसे मिलो ये मीनाक्षी हैं..

हमारा ऑफिस जॉइन किये अभी एक महीना ही हुआ है.” ..”हैल्लो सर ..जी मैं मीनाक्षी ..जी अभी एक महीना ही हुआ..सर आपकी विचारधारा कितनी ऊँची है..मैं तो आपकी फैन हो गयी हूँ”..इस तरह दोनों का आपस में परिचय हो गया।एक दिन शाम को मीनाक्षी ऑफिस के बाहर ऑटो का इंतज़ार कर रही थी तभी सुधीर अपनी बाइक निकाल रहा था। “सर नमस्ते…कैसे हैं आप?”..”कैसी हो..ऑटो नहीं आया..किधर रहती हैं आप..अरे वाह मेरे घर से लगभग एक किमी दूर आपका रूम है.. चलिये मैं छोड़ देता हूँ”।

और मीनाक्षी बाइक में बैठ गयी। “सर अंदर आएंगे ..मैं अच्छी चाय बनाती हूँ..”। छोटे छोटे से दो रूम थे।रूम में किताबों का ढेर देख सुधीर ने पूछा-“मीनाक्षी ये सब आप पढ़ रहीं हैं?” “जी सर मैं बैंकिंग की तैयारी कर रही हूँ.. एनजीओ इसलिये जॉइन किया मुझे कुछ कमाना भी था..मम्मी पापा से लेना अच्छा नहीं लगता..मेरे से छोटे एक भाई और बहन हैं..जी..पापा मैथ्स के टीचर हैं..पूरी फैमिली गाजियाबाद ही रहती है..मैंने कोचिंग जॉइन करी थी..

नेहा मेरी सीनियर हैं..उन्होंने ने एनजीओ जॉइन करने की सलाह दी थी.. जी अगले महीने ही मेरा एग्जाम है”..मीनाक्षी चाय बनाते हुए बोले जा रही थी। “वाह चाय तो वाक़ई में बहुत अच्छी बनी है..अच्छा चलता हूँ..”। और सुधीर चले गया।अब अकसर वो दोनों बाइक में साथ ही आ जाते थे।आज मीनाक्षी ने आफिस से छुट्टी ली थी उसका बैंक का टेस्ट जो था।तभी उसके मोबाइल में वाइब्रेशन होता है ।”हैल्लो मीनाक्षी आल द बेस्ट..बढ़िया पेपर करना”..”जी थैंक यू सर”…

आज नेहा का भी बर्थडे था उसने पूरे स्टाफ को पास के ही रेस्त्रां में पार्टी दी थी..मीनाक्षी ने स्लीवलेस गाउन पहना था और वो बहुत ही सुंदर लग रही थी।सुधीर ने जब उसे देखा तो देखा रह गया।पूरी पार्टी में मीनाक्षी उससे नज़रे चुरा रही थी।नेहा ने चुपके से मीनाक्षी से कहा -“लगता है यार आज तो गया छोरा काम से..तुझे पक्का प्रपोस करने वाला है” ..”देखतें हैं ..देखतें है..”। मीनाक्षी मज़ाकिया लहज़े में बोली।

पार्टी खत्म होते ही सुधीर बोला चलो मीनाक्षी मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ।घर पहुंच कर जैसे ही मीनाक्षी कमरे में जाने लगी सुधीर बोला”आज चाय नहीं पिलाओगी”..”अरे सॉरी सर आइए अंदर आइए”।मीनाक्षी चाय बनाने के लिए अपने छोटे से रसोईघर में गई और चाय बना के ले आई।”सुनो मीनाक्षी आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो..” “शुक्रिया सर”..कुछ देर की खामोशी के बाद वो बोला”मुझे तुम से कुछ कहना था..शायद मैं तुमसे प्रेम करने लगा हूँ..और तुम से शादी करना चाहता हूँ”मीनाक्षी भी तो ये ही सुनना चाह रही थी।

बस हो गया शुरू दोनों के जीवन में प्रेम..मीनाक्षी ने घर पर अपनी माँ को भी बता दिया था।दोनों बस प्रेम की बयार में बहे जा रहे थे।आज मीनाक्षी का रिजल्ट भी आ गया।और वो परीक्षा पास कर चुकी थी।उसने घर पर पापा को फोन करके बताया -“पापा मैं बैंक पीओ में निकल गयी..जी पापा.. हाँ मैं आ रही हुँ.. आज ही”। फिर उसने सुधीर को फोन लगाया “सुधीर मेरा बैंक में हो गया..हाँ मैं अभी घर को निकल रही हूँ..”। ठीक है कहकर सुधीर ने फोन रख दिया।मीनाक्षी ने सोचा सिर्फ ठीक है..पर वो इतनी खुश थी कि उसने इस पर ज्यादा गौर करना ठीक नहीं समझा।और कुछ ही देर में वो घर पहुंच गई।

पापा ने उसका मुँह मीठा कर स्वागत किया।सारे मुहल्ले वाले भी खुश थे कि लड़की ने छः माह की कोचिंग भी की..जॉब भी की और अब देखो परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली।तभी सुधीर का फोन आता है-“सुनो कब आ रही हो तुम..मुझे घरवालों से भी मिलाना है तुम्हें..” “बस जोइनिंग लेटर मिल जाये फिर कहाँ पोस्टिंग होती है..बस ये पता चल जाये.इसके बाद मैं आपके घर वालों से मिल लुंगी..और फिर हम एक हो जायेंगे..और दोनों मिलकर काम करेंगे और एक छोटा सा आशियाँ बनायेगें”।

“सुधीर थोड़ा तल्ख़ी से बोला “कहीं जॉइन नहीं करना हैं.. तुमने एग्जाम क्वालीफाई कर लिया बहुत है यार..मेरी बीवी सुबह से शाम तक काम करें ये मुझे पसन्द नहीं..मेरी सैलरी बहुत है..जितनी तनख्वा तुम्हें बैंक देगा..उसका दुगना..मेरी पूरी सैलरी तुम्हारे हाथों में होगी..और फिर क्या गारंटी कि तुम्हें दिल्ली ही पोस्टिंग मिले.. ना बाबा ना.. मैं अपनी बीवी को दूसरे शहर में जॉब नहीं करने दुंगा..

मेरे ऑफिस में अभी तक काम कर रहीं थी वो तो भी चल जाता..क्योंकि तुम मेरी नज़रों में तो रहती ..पर दूसरी जगह बिलकुल नहीं”..”ये क्या कह रहे हैं आप..मज़ाक अच्छा कर लेते हो..मेरे तो प्राण ही सूख गए थे..आपकी बात सुनकर “..”अरे नहीं मैं मज़ाक क्यों करुंगा?सच बोल रहा हूँ मैं..मुझे नौकरी वाली बीवी नहीं चाहिए..जब एक बार कह दिया है..तुम्हें एक बार में समझ नहीं आता क्या “..अब वो गुस्से से बोला।

सुधीर का ये व्यवहार देखकर मीनाक्षी को गहरी चोट लगी उसने अपने को संयत किया और बोली-“ये क्या बीवी बीवी लगा रखी है..जिसे अभी बोलने की तमीज़ नहीं ..उससे मैं बाद में भी अच्छा बोलने की आशा नहीं रख सकती…मैं तो तुम्हारे करीब तुम्हारी विचारधारा को सुनकर आयी थी..मुझे नहीं पता था कि तुमने अपने चेहरे पर नकाब लगाए थी…महिला दिवस में बड़ी बड़ी बातें…सब झूठ..सब दिखावा..दोगला चरित्र है तुम्हारा..

भाषण में बड़ी बड़ी बातें और असल में औरत को पैर की जूती समझने वाले पुरुष को मैं अपनी ज़िन्दगी से खुद बेदखल करती हूँ..अच्छा हुआ तुमने अपना चेहरा मुझे खुद ही दिखा दिया ..आइंदा मुझे फोन करने की कोशिश भी मत करना “…।

और मीनाक्षी ने मजबूती से अपनी बात रखते हुए फोन काट दिया।और वापस पलटी तो देखा पीछे पापा खड़े थे -“आज मुझे अपनी परवरिश पर गर्व है..मैंने बेशक तुम्हे आज़ादी दी..पर अब मुझे विश्वाश है कि तुम आज की सशक्त नारी हो..मुझे तुम्हारे निर्णय पर गर्व है.”तो दोस्तो ये था मीनाक्षी का निर्णय ।क्या आप लोग उसके निर्णय के साथ हैं? अपनी प्रतिक्रिया देकर बताइयेगा जरूर ।

आपकी स्नेह (सर्वाधिकार सुरक्षित) 

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