ऑनलाइन क्लास से बच्चों में क्या परिवर्तन आया है? - पढ़िए इस खास गुलाबी चर्चा को

ऑनलाइन क्लास से बच्चों में क्या परिवर्तन आया है? - पढ़िए इस खास गुलाबी चर्चा को

इस बार गुलाबी चर्चा में हमने पिंक कॉमरेड्स से पूछा एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल- कोविड-19 की वजह से काफी समय से बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, आपने ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में क्या परिवर्तन देखा है ?


इस सवाल के जवाब में हमारी pink comrades ने क्या कहा आइये जानते हैं-


Sunita Tiwari- ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की आंखों और पीठ पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही पढ़ाई के प्रति वो बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं,अपितु पेरेंट्स पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं।


Ruby Jain- सकारात्मकता ये है कि बच्चों ने घर से शिक्षा ग्रहण करना स्वीकार कर लिया है; जिसका का प्रतिशत भी कम ही है। ऑनलाइन स्कूल से समय की और अलग अलग कोचिंग की भागदौड़ कम हुई है। परंतु इसके दुष्प्रभाव हम भारतीय मां बाप को ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। होम एजुकेशन विदेशों में प्रचलित और सफल भी है। परंतु भारतीय शिक्षा प्रणाली की शुरुआत ही गुरुकुल से हुई जो प्रथा बद्ध होते होते अनुशासित हो गई। और शायद इसीलिए विद्यार्थियों को फिर से विद्यालय खुलने का इंतज़ार है। भारत जैसे विविध भाषी और संस्कृति देश में ऑफलाइन विद्यालय का महत्व इसीलिए भी बढ़ जाता है ताकि सभी भाषा भाषी और जाति के बच्चे एक दूसरे के प्रति मेल मिलाप और सद्भावना की परंपरा को न सिर्फ़ समझें बल्कि जीवन में अंगीकार भी करें।


ममता जैन- जो बच्चे पढ़ना नहीं चाहते उनके लिए तो फायदा ही फायदा है उसपर पास होने की गारंटी है।इससे वास्तव में जो बच्चे पढ़ना चाहते हैं उनका काफी नुकसान हुआ है।चीटिंग करने के नए तरीके इजाद हो गए है।शारीरिक निष्क्रियता के साथ माता पिता की जेब पर फोन के अनचाहे खर्च बढ़ गए हैं।कई बार कई अप्रिय स्तिथियां बन जाती है।



मनप्रीत मखीजा- अगर सकारात्मक प्रभाव देखें तो बच्चे 45 मिनट की ऑनलाइन क्लास में सिर्फ और सिर्फ अपने टीचर को ही सुन रहे है । स्क्रीन पर टीचर की शेयर्ड स्क्रीन होती है तो दूसरे बच्चों पर ध्यान नही जा रहा जो कि मेरे ख्याल से स्कूल में शायद कम होता क्योंकि वहाँ बच्चे आपस मे एक दूसरे पर या उनकी नोटबुक पर नजर जरूर रखते। आदतन, हम भी वही किया करते थे कभी कभार।45 मिनट की क्लास के दौरान सब कुछ सीख लेने की एक अजब उत्साह और शक्ति मुझे बच्चो में देखने को मिली। वही अगर नेगेटिव वे में देखा जाए तो बच्चे इमपेशेंस भी होते दिख रहे है। बच्चे हैं न, आखिर एक जगह टिककर लगातार स्क्रीन घूरना कुछ बच्चों को ऊबाऊ लगता है। 


संगीता अग्रवाल- ऑनलाइन क्लासेज बच्चों के लिये मजबूरी बन गए हैं,उनका स्वभाविक विकास अवरूद्ध हो गया है,जो चीज़ वो टीचर और बच्चों के संग सीखते थे,अब खत्म हो चली है।बहुत छोटे बच्चों को तो मानसिक रूप से इस बात के लिये तैय्यार करना बहुत कठिन है कि दूसरी तरफ उनकी टीचर है जो उन्हें कुछ सिखा रही है।अनुशासन, शेयरिंग,दोस्ती,इन सबसे आजके बच्चे अनजान हैं,इसके अलावा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य,आंखों की रोशनी,गलत पोस्चर की वजह से जो दिक्कतें रोज आ रही हैं वो अलग।कुछ बच्चे तो लिखना ही भूलते जा रहे हैं।


दीपिका राज सोलंकी- ऑनलाइन क्लासेज से बच्चों में दोनों प्रकार के प्रभाव देखने को मिल रहे सकारात्मक और नकारात्मक भी।इस महामारी में बच्चे घर में सुरक्षित हैं जो सबसे बड़ी बात है।लगातार ऑनलाइन क्लासेस बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रही है। स्क्रीन पर लगातार देखते रहने से आंखों की प्रॉब्लम तो हो रही है साथ में बच्चें मानसिक रूप से भी थक जा रहे हैं। 


पुअर नेटवर्क प्रॉब्लम की वजह से कक्षा में जॉइनिंग करनेंतथा समझने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, अभिभावकों के लिए खासकर मांओं का काम बढ़ गया है , घर की देखभाल के साथ-साथ बच्चों के साथ लगातार पांच -पाचं घंटे बैठना पड़ रहा है। इस से परिवार में असंतोष पैदा हो रहा है। ऑनलाइन क्लासेस की वजह से बच्चों में रीडिंग राइटिंग स्किल्स कम हो रहा है। अभिभावक और स्कूल प्रबंधक को मिलकर ऑनलाइन क्लासेस में कुछ सुधार करने आवश्यक है ताकि बच्चे इस महामारी में घर में सुरक्षित रह कर अपनी पढ़ाई सही से कर सकें।


रितु अग्रवाल- ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों में कई तरह के परिवर्तन आए हैं। बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है क्योंकि पढ़ाई भी ऑनलाइन होती है गृहकार्य भी ऑनलाइन ही करके भेजना पड़ता है तो इसका आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ता है।साथ ही बच्चे अपने मित्रों से मिल नहीं पाते हैं जैसे कि वे स्कूल जाते समय मिलते और बात करते थे। कभी खेलने के लिए मैदान में जा रहे हैं तब बात कर रहे हैं बस में बात करते थे तो सामाजिकता में भी कमी आई है। उनके शारीरिक खेलकूद में कमी आई है। अच्छी चीज में कहूं तो यह है कि बच्चों का और माता पिता का भावनात्मक संबंध पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है क्योंकि बच्चे घर पर ज्यादा समय बिता रहेे हैं। बच्चों का तकनीकी ज्ञान भी बढ़ गया।


ये विचार हमारी पिंक कॉमरेड्स ने शेयर किये, ऑनलाइन शिक्षा पर आपके क्या विचार हैं? कमेंट सेक्शन में हमारे साथ ज़रूर साझा करें।


एक नए विषय पर गुलाबी चर्चा के साथ हम जल्दी ही वापस आएंगे।


धन्यवाद,

टीम, द पिंक कॉमरेड







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