औंधे मुँह गिरने का कारण: कॉमरेड पूजा शर्मा का एक आलेख

औंधे मुँह गिरने का कारण: कॉमरेड पूजा शर्मा का एक आलेख

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा तीनों कृषि कानूनों की वापसी को मोदी सरकार पर किसानों की अभूतपूर्व जीत के तौर पर देखा जा रहा है | लगभग 1 साल से विरोध कर रहे किसानों को कई शाहदत और मुश्किलों के बाद ये जीत हासिल हुई है | गोदी मीडिया बेशक इसे प्रधानमंत्री मोदी की उदारता कहकर पेश करे लेकिन देश की जनता जानती है कि ये प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की एक बहुत बड़ी विफलता है| जहाँ सरकार के मंत्री और गोदी मीडिया, सुबह-शाम,चिल्ला-चिल्ला कर किसान सत्यग्रहियों को खालिस्तानी , ग़द्दार और ना जाने क्या क्या कह रहा थे, वहां ऐसा क्या बदला कि सरकार सर मुड़ाते ही ओले खाने को तैयार हो गई और इन तीन कानूनों को बिना किसी शर्त के वापस ले लिया | पिंक कामरेड पूजा शर्मा का एक आलेख |  


उत्तर है सियासत की मजबूरियाँ और वजह है आगामी उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनाव | इन प्रदेशों में मतदाताओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा किसानों का हैं जो मोदी सरकार से कृषि कानूनों के मुद्दे पर बहुत नाराज है | केंद्र सरकार पंजाब की हार तो झेल सकती हैं लेकिन उत्तर प्रदेश की हार भाजपा के दिल्ली क़िले को मिट्टी में मिलाने की ताकत रखता है| यदि उत्तर प्रदेश हाथ से गया तो दिल्ली सल्तनत के दिन भी गिने चुने मानिये | महिला सुरक्षा , कोरोना कु-प्रबंधन, बुरी अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी जैसे मुद्दे पर विरोध झेल रही भाजपा की परेशानियों की सूची ख़तम होने का नाम नहीं ले रही है| भाजपा नेतृत्व को लगा कि किसान सत्याग्रह एक लम्बे समय तक नहीं चल पायेगा और अपनी मौत मर जाएगा | लेकिन किसानो ने अपने सतत प्रयासों से सरकार को न सिर्फ घुटने पर ला दिया बल्कि चारो खाने चित भी कर दिया | शायद इसलिए भाजपा हाई कमान ने एक पाँव पीछे लेने का निर्णय लिया है | देखने लायक बात ये होग कि ये कदम भाजपा को पीछे ले जाने मे मददगार होगा या एक छलांग लगाने मे |

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