पहले पीरियड लिए बिटिया को करें तैयार

पहले पीरियड लिए बिटिया को करें तैयार

28th May को Menstrual Hygiene Day पर SARIKA GUPTA जी ने पीरियड की समस्या को लेकर बहुत अच्छा समझाया उनकी बातों से  यही समझ आया कि एक मां को अपनी बेटी को पहली बार माहवारी होने पर कैसे तैयार करें और उनकी समस्याओं को किस तरह से ध्यान में रखते हुए उन्हें सरलता से समझाएं ।अगर आपकी बेटी का भी पहला पीरियड है तो इसके लिए बेटी भी तैयार रहे ही, साथ में आप भी।

 वैसे तो आजकल के दौर में यह मुश्किल नहीं है क्योंकि अब टीवी, मोबाइल, सोशल मीडिया पर हर तरह की जानकारी है और यह आसानी से बच्चों को पता भी चल जाता है। लेकिन फिर भी  मां को यह चिंता हमेशा परेशान करती है कि उनकी बेटी को इस दौरान किसी तकलीफ से न गुजरना पड़े।  

आजकल 9-11 साल की उम्र तक ज्यादातर लड़कियों को पीरियड शुरू हो जाते हैं। यह संभव है कि बेटी बात करने में कंफर्टेबल महसूस न करें या आप अपनी बिटिया से बात करने में हिचकिचाएं। तो बेटी को कंफर्ट करें। और दोस्त की तरह बात करें। यह सही है कि पीरियड्स पर बात करने के लिए बेटी बहुत छोटी है, ऐसे में उसको समझाने के साथ-साथ उसे समझना भी जरूरी है।

अगर बेटी के मन में पीरियड्स को लेकर सवाल हैं तो उसके सवालों को टालें नहीं बल्कि उनके जवाब दें। उसे बताएं कि सवाल पूछना सही है उसमें कोई बुराई नहीं। उसे बताएं कि अब उसे अपना ख्याल कैसे रखना है।

ज्यादातर लड़कियों को 11-14 साल की उम्र तक कभी भी पीरियड्स आ सकता है। लेकिन अगर ऐसा लगे कि पीरियड्स आने में देरी हो रही है तो डॉक्टर से एक बार जरूर सलाह लें। पीरियड्स के पहले दिन से लेकर दूसरे पीरियड्स के पहले दिन के बीच गैप का साइकल आमतौर पर यह 25-35 दिन के बीच होता है। बेटी को यह  जानकारी दें और साथ ही बताएं कि पीरियड्स के शुरुआती कुछ सालों में ब्लड का रंग हल्का लाल, गहरा या काला हो सकता है और पीरियड्स 4-7 दिन तक रह सकता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है।

कुछ समय तक पीरियड्स साइकल रेग्युलर नहीं होगा और इसे सेट होने में कुछ समय लग सकता है। शुरुआत में ब्लीडिंग का फ्लो ज्यादा हो सकता है इसलिए हर 4-6 घंटे में पैड चेंज करने के बारे में बताएं। हाइजीन का कैसे ध्यान रखना है यह भी उसे समझाएं और पीरियड्स हाइजीन के बारे में पूरी जानकारी दें।

 बेटी को बताएं कि पीरियड्स कोई बीमारी नहीं है जो हर महीने 4-5 दिन के लिए उसे बीमार कर देगी। यह शरीर में हो रहा बदलाव है और इससे रोजमर्रा के कामों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। दूसरा, बच्ची कहीं अचानक ब्लड देखकर घबरा न जाए इसलिए उसका यह डर खत्म करना जरूरी है कि इससे शरीर में किसी तरह की कमजोरी नहीं होती।

स्कूल में या घर के बाहर बच्ची को कभी भी पीरियड्स आ जाए तो वह इसके लिए पूरी तरह तैयार करें। इसके लिए  एक किट बना लें।कभी बेटी को अकेले ही सब मैनेज करना हो, इसलिए भी पीरियड्स किट का तैयार करके रखना जरूरी है। 
एक जिप पाउच में टीन-साइज सैनिटरी नैपकिन पैड्स, पैंटी का एक पेयर और एक्स्ट्रा पेपरबैग/टिशू पेपर किट में रखें। बेटी को हर समय इसे अपने साथ रखने के लिए कहें। उसके स्कूल बैग में और अगर ट्यूशन या क्लासेज वगैरह जाती है तो उस बैग में भी एक किट रख दें। 

किट उसे उसके सबसे बड़े डर यानी लीक के डर से भी दूर करेगी। उसे बताएं कि अगर अंडरवेयर ब्लीडिंग की वजह से खराब हो जाए तो उसे पेपरबैग या टिशू में लपेट कर बाथरूम के डस्टबिन में फेंक दे और किट में रखा नए अंडरवेयर का इस्तेमाल कर ले।

शुरू के दिनों में बेटी को पीरियड्स की समस्याओं से गुजरना ही होगा। ऐसे में अगर उसे कभी लीकेज या स्पॉटिंग की दिक्कत हो जाए और आप आसपास न हों तो वह किससे इस बारे में बेझिझक बात करे यह आप उसे समझाएं। जैसे बच्ची स्कूल जाती है तो वह अपनी टीचर को इसके बारे में बताए या दोस्त से शेयर करे या कोई भी ऐसा इंसान जिस पर पूरी तरह ट्रस्ट कर सके। बच्ची इस दौरान बहुत इमोशनल बदलावों से गुजरती है इसलिए उसे यह आश्वस्त करें कि किन लोगों पर विश्वास कर सकती है। बेटी को यह भी समझाएं कि अगर कभी उसकी दोस्त को ऐसी दिक्कत हो जाए तो वह उसे भी गाइड करे और एक-दूसरे का ऐसे समय में साथ दे।

पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं को हौवा न बनाएं ,बेटी को पहले पीरियड्स की जानकारी देने के चक्कर में उसे डरा न दें। कई लड़कियों को पीरियड्स के दौरान काफी तकलीफ भी होती है, अगर ऐसा है तो डॉक्टर की सलाह के बाद दवाई ली जा सकती है।

बेहतर यही है कि बेटी को पीरियड्स शुरू होने के बाद रेग्युलर चेकअप के लिए डॉक्टर को एक बार जरूर दिखा लें। बिहेवियर 
 और मूड  जैसी समस्याओं का सबसे अच्छा उपाय यही है कि आप उसका साथ दें और एक दोस्त बनकर उसकी हर जरूरत को समझें और उसे सपॉर्ट करें, तभी बेटी का पहले पीरियड का अनुभव सुखद होगा।

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