पीरियड्स इसमें शर्म और झिझक कैसी

पीरियड्स इसमें शर्म और झिझक कैसी

माहवारी, महीना, रजस्वला या फिर आजकल  पीरियड्स नारी देह से जुड़ी एक स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन पता नहीं घरवालों ने, समाज ने और नारी ने स्वयं उसका इतना हव्वा क्यों बनाकर रख दिया और इसे एक वर्जित और शर्मनाक प्रकिया बना दिया जबकि इस प्रक्रिया के बग़ैर नारी मातृत्व जैसे सम्माननीय पद की गरिमा नहीं बढ़ा सकती।
    
जब एक लड़की का पीरियड आता है, ऐसा लगता है जैसे कोई बड़ी सी सज़ा मिल ग‌ई हो,पांच दिन बिल्कुल अलग रहो बिल्कुल अछूतों जैसा व्यवहार , रसोई में मत जाओ,अचार मत छुओ, बिस्तर पर मत सोओ,बाल जरूर धोओ,अलग नहाओ सब लोग जो साबुन, शैम्पू इस्तेमाल करें वो मत करो और भी पता नहीं क्या क्या। 

मैंने तो अपने समय में इसके बहुत रूप झेले हैं, मां तो इतना विचार नहीं मानती थी लेकिन मेरी दद्दा ( मेरी दादी मां) वो इतना ज्यादा इसका  विचार मानती थी कि मैं खूब रोती और भगवान से मनाती जब तक दद्दा यहां रहें इनके सामने मेरा पीरियड न आए लेकिन वो तो हर महीने अपने समय से पहले ही आ जाता और फिर वही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना शुरू हो जाती।उस समय पेट में इतना ज्यादा दर्द होता कि सहना मुश्किल हो जाता और  ऐसे में दद्दा का फरमान जारी हो जाता कि आज स्कूल नहीं जाना है और कुछ छूना नहीं है। उस समय लगता कि इनके सामने घर पर बैठने से अच्छा है स्कूल चले जाएं लेकिन उनके सामने बोलने की हिम्मत नहीं होती और मां तो उनके सामने गूंगी हो जाती । पापा और भ‌ईया के सामने इतनी शर्म आती क्योंकि दद्दा इतना उसका इतना बवाल बनाती कि उस समय पीरियड्स अभिशाप लगते थे।  उस समय तो लड़कियां इतनी पीड़ा, इतनी परेशानियां से जूझ रही होती हैं ,ऊपर से ये सब बिल्कुल तोड़कर रख देता। दद्दा तो मां के साथ भी यही सब करतीं तो मां का तो इस मामले में बोलने का सवाल ही नहीं उठता । 

ख़ैर दद्दा के साथ ये समय जैसे तैसे बीत गया फिर शादी होकर ससुराल आई तो सासूमां तो छुआछूत में मेरी दद्दा से भी चार क़दम आगे निकलीं जब पीरियड्स आयें तो बाल धोकर नहाने,पूरा बाथरूम धोना रोज चादरें बदलकर धोना,रसोई में मत जाओ,पति से बात मत करो, उनके साथ में खाना मत खाओ और भी बहुत कुछ। पूरे घर में उन्हीं का राज चलता तो उनके आगे भी कोई कुछ नहीं बोल सकता लेकिन मैंने मन ही मन दृढनिश्चय कर लिया था कि अब बस बहुत हुआ मैं अपनी बेटी को ये सब नहीं झेलने दूंगी ।

हम लोग छोटी जगह से हैं तो मेरे दोनों बच्चे ( बेटा-बेटी) रोज स्कूल बस से आते जाते हैं तो मुझे रोज़ ही अपनी बेटी की चिंता लगी रहती कि पता नहीं किस समय( आजकल बेटियों का कम उम्र में पीरियड आ जाता है) उसका पीरियड शुरू हो जाये। जब वो सात या आठ साल की रही होगी उस समय टीवी पर  सेनेटरी नैपकिन का विज्ञापन आ रहा था, तभी मेरी बेटी मुझसे पूछने लगी कि "मां ये क्या होता है "?और मुझे तो उसे ये सब बताने का मौका मिल गया।

मैंने उसे पीरियड्स से जुड़ी  सारी बातें बहुत अच्छे से समझाईं, उसे पूरा पैड खोलकर दिखाया और इसे इस्तेमाल करने का तरीका भी समझाया। मैं रोज उसके बैग में दो पैड रख देती और उसे ये भी समझाया कि अगर किसी समय स्कूल में उसके पीरियड की शुरुआत हो तो वो डरे और रोये नहीं, सीधा अपनी टीचर के पास जाये और अगर घर पर शुरूआत होगी तब तो मैं संभाल ही लूंगी।

धीरे धीरे करके उसे मैं सब समझाती कि ये लड़कियों-महिलाओं के शरीर की एक स्वाभाविक और प्राकृतिक ( आज की भाषा में नेचुरल प्रोसेस) प्रकिया है,हर लड़की का पीरियड आना बहुत जरूरी होता हैअगर किसी वजह से अगर किसी लड़की का पीरियड सही समय पर नहीं आता है तो उसके शरीर में कोई कमी होती है और डाक्टर को दिखाना पड़ता है। सही समय पर पीरियड आना अच्छी बात है, उसमें शर्म और झिझक जैसी कोई बात नहीं होती है।उसे इस समय पर्सनल हाईजीन के बारे में भी पूरी जानकारी दी।आजकल बच्चे बहुत समझदार और एक्टिव होते हैं उन्हें सब बातें बहुत जल्दी समझ में आ जाती हैं।

मेरी बेटी को मेरी ये बातें बहुत अच्छे से समझ में आ गई और जब उसके पीरियड की शुरुआत हुई तो वो बिल्कुल भी डरी और रोई नहीं। उसने सबकुछ बहुत अच्छे से संभाला, कभी उसके कपड़े वगैरह गन्दे नहीं हुए। मैं भी उसका शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से उसका सहयोग करती, मैंने उसे ये भी समझाया कि इसमें पापा और भाई के सामने शर्माने वाली कोई बात नहीं होती है ये तो एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और सब इसके बारे में जानते हैं। 

मैंने तो अपनी बेटी को सबकुछ बहुत अच्छे से समझाया और उसका हमेशा साथ भी देती हूं। आप लोग भी अपनी बेटियों को इसी तरीके से समझायें जिससे कि पीरियड्स उनके लिए परेशानियों की वजह  न बनें। ये तो नारी शरीर की एक स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसके बिना भी नारी अधूरी है फिर इसमें शर्म और झिझक कैसी। मैं अपनी बेटी का पूरा सहयोग करती हूं छुआछूत जैसे बवाल नहीं उसका पीरियड कब आता है,कब चला जाता है किसी को पता ही नहीं चलता है।

आज मैंने एक बहुत ही जरूरी विषय पर लिखा है और सच में मुझे बहुत ही आत्मसंतुष्टि मिली है। ऐसी परमपराएं किस काम की जिससे ‌ मन में जीने कीई इच्छा ही खत्म हो जाए ।पीरियड्स की वजह से हम औरतों , लड़कियों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसलिए कृपया अपनी बेटियों को सबकुछ सही समय पर और खुलकर समझाईये जिससे उन्हें कहीं बाहर ये स्कूल में शर्म और झिझक का सामना न करना पड़े। उनका पूरा सहयोग करिए उन्हें बताईए इन्हीं पीरियड्स के द्वारा नारी मातृत्व को प्राप्त करती है इसमें शर्माने जैसा कुछ भी नहीं होता, सब लोग इसके बारे में जानते हैं ये कोई वर्जित विषय नहीं है। ये हर मां बेटी से जुड़ी हुई जानकारी है और बहुत उपयोगी है मैं हमेशा से ये चाहती हूं कि मैंने जो परेशानियां झेली हैं वो  मेरी बेटी या कोई और  न झेले।

दोस्तों पढ़कर अपनी राय अवश्य लाइक , कमेंट करके  बताएं। धन्यवाद

     

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