#पीरियड से जुड़ी बातें

#पीरियड से जुड़ी बातें

# Mahawari nahi hai koi bimari


मासिक धर्म , माहवारी, पीरियड जाने कितने ही नाम इस हर महीने की परेशानी के,पर हमें बचपन से सिखाया जाता, इनमें से एक भी नाम का जिक्र ना करना किसी के सामने, जैसे हमसे कोई पाप हो गया हो।जब पहली बार इस का सामना किया तो छोटी उम्र में ये ही समझा कि ये साल में एक बार होता है, लेकिन जब अगले महिने फिर हुआ,तो बहुत

रोई थी ये क्या मुसीबत।


मुझे अब समझ में आता है , ज़रूरी है कि हम अपनी बेटियों ही नहीं बेटों को भी ‌पीरियड के बारे में सब कुछ खुलकर बताएं। जिससे बेटियां मानसिक और शारीरिक रूप सेसे अपने आपको संभाला सके बिना घबराए,

और बेटों के लिए भी,ताकि वो इन दिनों में अपनी माँ ,बहन या घर की दूसरी स्त्रियों की तकलीफ़ को समझे,और घर के कामों में उनकी मदद करें,ना कि उन्हें अपवित्र समझे।


साथ ही बेटे ये जान कर , नारी जाति का सम्मान करना सीखेंगे आसान नहीं है जननी जीवनदायिनी बनना।हमने पैड का इस्तेमाल तो सीख लिया पर अभी भी औरतों के अंदर एक हिचकिचाहट है , मेडिकल स्टोर पर जाकर पैड का नाम लेने में ऐसे डरती है, जैसे कोई ग़लत चीज़ माँग रही हो।ऊपर से वो काले पॉलिथीन में पैकिंग,मानो किसी को दिख ना जाए बस।


हमें खत्म करना होगा ये सब।माहवारी कोई बीमारी नहीं, अपितु नियमित रूप से हो तो,एक स्वस्थ नारी की निशानी है। आजकल तो परिवार जागरूक हो रहे हैं,और इस स्थिति में सब मिलजुल कर घर की लेडिज की काम में मदद करते हैं।

ना अब पहले की तरह अलग बिस्तर,ना अलग बर्तन, लोगों को समझने लगे हैं ये भी शरीर की एक सामान्य क्रिया है।

आज महिलाएं ने हर क्षेत्र में एक मुकाम हासिलकिया है, बिना इन दिनों की परवाह किए।समाज में धीरे ही सही पर बदलाव आ रहा है। लेकिन महिलाओं को इस दिशा में


खुद भी पहल करनी होगी, तभी हम परिवर्तित कर पाएँगे पूरानी सोच को।


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