परेशानियों से अपनी पुरज़ोर लड़ना सीखा है

सखियों ग़ज़ल लिखने का मेरा प्रथम प्रयास

परेशानियों से अपनी पुरज़ोर लड़ना सीखा है 

मैंने ख़ुद के मुक़द्दर से लड़कर जीतना सीखा है !

ज़माने ने उठाये जब मेरी मोहब्बत पर सवाल,

मैंने इश्क की रवायतों में बस दहकना सीखा है !

महबूब की आँखों में देख उमड़ता प्रेम का दरिया,

इस दिल ने भी हसीं ख़्यालों में बहकना सीखा है !

लाख बंदिशें हों इश्क पर ज़ालिम दुनिया की,

मेरी रुसवाइयों ने ग़म में भी महकना सीखा है !

न रोक ‘अंशु’ अपने दिल की बेखौफ़ उड़ान,

हौसलों ने तेरे, ऊँची परवाज़ भरना सीखा है । 

अंशु श्री सक्सेना

मौलिक
Read This Also – https://www.thepinkcomrade.com/bhoot-dost/

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0