आलू के गुलाबजामुन

आलू के गुलाबजामुन

माँ को आज अपने हाथ से गुलाबजामुन खिलाते हुए असीम तृप्ति का अनुभव हो रहा था, और मन अतीत के गलियारे में भटक रहा था |

अम्मा ए अम्मा हमें भी खाने को गुलाबजामुन चाहिए, पैसे दो हम खरीद कर लाते हैं |बिट्टू रसगुल्ला खाने की हमरी औकात नहीं है बिटिया हमें नून रोटी मिल जात है पेट भरने को वो ही बहुत है। पर काहे अम्मा हमरी औकात काहे नहीं रसगुल्ला खाने की ठाकुर साहिब के ईहां रोज कुछ न कुछ आत है, कभी जलेबी, कभी रबड़ी जब ऊ खा सकत हैं तो हम काहे नहीं | हम कुछ नहीं जानत हमें गुलाबजामुन खाने हैं तो खाने हैं बस, नहीं तो आज हम घर भी नहीं आयेंगे तुम्हरे साथ |

लाडो ऐसे जिद नहीं करत हैं, अच्छा तुझे मिठाई ही खानी है न तो चल हम तुझे गुलाबजामुन जैसे ही दूसरी मिठाई खिलाते हैं सुन दौड़ के जा और रामदीन काका से दू ठे आलू मांग ला | ठीक है अम्मा और उस आलू को अम्मा ने चूल्हे पर रख दिया था पकने के लिए और थोड़ा सा गुड़ पिघलाने लगी थी, आलू पक जाने के बाद उसके छिलके उतार उसे मेस कर उस पर गुड़ की तरी डाल हमारे सामने परोस दी और फुसला दिया कि आलू के गुलाब जामुन जल्दी किसी को खाने को नहीं मिलते बस भगवान जिसे प्यार करते हैं उसे ही मिलते हैं, और मैं उनकी मीठी बातों से ज्यादा उनकी आँखों की नमी देख के मान गई थी |

अच्छा अम्मा एक बात बताओ हम खूब मन लगा कर पढ़ेंगे तो आगे हमें नौकरी करने दोगी, अरे नहीं बिट्टू 10 तक पढ़ ले फिर हाथ पीले कर देंगे हम तो तुम्हारे, तुमारी कमाई थोड़े ही न खाएंगे। माँ पर हमारी मैडम जी कहती हैं कि लड़कियों को अब जरूर कमाना चाहिए ऊ कह रही थी कि लड़कियों के आत्मनिर्भर रहने से बहुत सारी बुराई अपने आप खत्म हो जाएगी ऊ का कहत हैं, दहेज, लड़कियों को मारना पीटना और भी बहुत ए कुछ।

हाँ बिटिया ए सब तो हम सोचबे नहीं किए ई बात तो सही है अच्छा तुम अच्छे से पढ़ोगी तो हम तुम्हें खूब पढ़ाएंगे पर एगो वादा करो हर किलास में तुम ही फर्स्ट आओगी, बोलो, हम वादा करत हैं अम्मा खूब मन लगा कर पढ़ेंगे, वो दिन और आज का दिन हर क्लास में फर्स्ट आते आते स्कॉलरशिप से पढ़ते हुए आज आंगनबाड़ी के प्रमुख पद पर नौकरी लग चुकी थी मेरी। और अम्मा को आज मैं जी भर कर गुलाबजामुन खिला रही थी, पर उस आलू के गुलाबजामुन की मिठास मैं ताउम्र नहीं भूल पाऊँगी क्योंकि उसकी मिठास के कारण ही आज मैं यहाँ खड़ी हूँ |और लड़कियों के लिए पढ़ाई कितनी जरूरी है ये पूरे गाँव को समझा रही हूँ |

धन्यवाद
सुरभि शर्मा

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