केटेगरी : Pink Chronicles

आओ हिन्दी का सम्मान करें!

शान से हम बोलते हैं , हिंदी हमें है भाती, एक हिंदी के सिवा, कोई अन्य भाषा नहीं लुभाती। देश का जन-जन यहां, हिंदी का दम है भरता,देश का हर बच्चा-बच्चा, हिंदी की जय है करता। भिन्न धर्म और...

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आशा दीप जलाए रखना

माना, अभी है रात अंधेरी, तिमिर घनेरा छाया है,जित देखूं, उत मायूसी है, भय-शंका का साया है।जहरीली अब हवा हुई है, सांसो से महंगी दवा हुई है। शहर सूना, वीरान हुआ है, इक डर, दिल का मेहमान हुआ है। जो...

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एक महान लेखिका मन्नू भंडारी

हिंदी साहित्य में एक से बढ़कर एक लेखिका हुई हैं जिनकी लेखनी ने कोरे पन्नों पर जीवंत समां बाँधा है । आज हम जिस लेखिका की बात कर रहे हैं वह एक सुप्रसिद्ध कहानीकार हैं और उनका नाम है 'मनु भंडारी' ...

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बेहतर ज़िंदगी के लिए पापड़ तो बेलने ही पड़ते हैं

आपने यह मुहावरा तो सुना ही होगा 'पापड़ बेलना'  जी हाँ…... जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं । ज्योति नाईक ने यह सिद्ध...

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सुधा मूर्ति, मेरी मनपसंद लेखिका

कई भाषाओं में अनेकों किताब लिख चुकीं सुधा मूर्ति ना सिर्फ एक लेखिका है बल्कि अपने सामाजिक कार्य के लिए भी बखूबी जानी जाती हैं। सुधा मूर्ति का जन्म 19 अगस्त 1950 में कर्नाटका में हुआ था। बचपन से ही पढ़ने लिखने में तल्लीन...

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महादेवी वर्मामेरी पसंदीदा लेखिका

#इतिहास के पन्न्नो पर मेरी पसंदीदा लेखिका   महादेवी वर्मामहादेवी वर्मा (26 मार्च, 1907-11 सितंबर, 1987) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के...

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मेरी प्रिय लेखिका - महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा मेरी प्रिय लेखिकाओं में से एक है। महादेवी जी का जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश भारत में...

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सुभद्रा कुमारी चौहान

subhadra kumari chauhan. सुभद्रा कुमारी चौहान "बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी,खूब लड़ी...

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सुधा मूर्ति जिन्होंने पढ़ने के लिए किया था तीन शर्तों का...

जिन्दगी एक इम्तिहान है, जिसका पाठ्यक्रम पता नहीं होता और जिसके सवाल भी तय नहीं होते न कोई मॉडल पेपर होता है” ये बात सूधा मूर्ति के द्वारा कही गई है, सुधा मूर्ति जिन्होनें अपनी सादगी और समझदारी के बल पर सफलता हासिल...

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कवयित्री लेखिका व स्वतन्त्रता सेनानी मेरी प्रिय लेखिका...

बुझा दीप झाँसी का जब डलहौजी मन में हरषाया, राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया, फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया, लावारिस का वारिस बनकर...

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