केटेगरी : Story of the week

अपने हिस्से का मै आसमान चाहती हूं

अपने हिस्से का मै आसमान चाहती हूं   एक टुकड़ा बादल और थोड़ी हवाएं चाहती हूं   चंद तारों की टिमटिमाहट चाहती हूं  चांद , सूरज की चाह नहीं मुझे  चंद कतरे  धूप के मैं खिड़की पर चाहती...

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आ गया फागुन

पांव थिरक उठे खुदबाज उठे ढोल - मृदंगहवाएं लेकर आई धुनआ गया फागुन।प्रीतम की थी जोप्यासी अंखियांबाट...

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