पृथ्वी घर है सिर्फ ग्रह नहीं

पृथ्वी घर है सिर्फ ग्रह नहीं

दुनिया की बेहतरीन स्पेस सेंटर में
“सर! जल्दी चलिए स्क्रीन पर एक संदेश है। कोई सम्पर्क स्थापित करना चाहता है। साथ ही अलर्ट का सिग्नल भी है।”
सीनियर साइंटिस्ट्स भागते हुए आते हैं। पैनल पर कुछ टाइप करने के बाद
” क्या हम जान सकते हैं आप कौन है और कहां से बोल रहे हैं”? “
मैं सारे देशों के प्रतिनिधियों को एक साथ संबोधित करना चाहती हूं। तुम्हारे पास समय बहुत कम है।
उधर से महिला आवाज आई।
आनन-फानन में एक प्रतिनिधि मंडल बुलाया गया।
” कहिये अब आप क्या कहना चाहती हैं?”
” पृथ्वी खाली कर दो जल्द से जल्द वर्ना मुझे जबरन आप सब को एक साथ हटाना पड़ेगा” स्क्रीन से आवाज़ आई।

सर! सिग्नल से पता चल रहा है कि अर्थ के कोर से ये मैसेज आ रहा है।
प्रतिनिधि – “आप होती कौन है हमे पृथ्वी से बाहर करने वाली?”

पृथ्वी – “मैं पृथ्वी ही हूँ और अब बर्दाश्त के बाहर है तुम लोगों के अत्याचार, इससे पहले तुम लोग मुझे खत्म करो मैंने दूसरे एलियन जीवन से समझौता कर लिया है। उन्होंने वादा किया है कि वो मेरा ख्याल रखेंगे।”

प्रतिनिधि – आप ऐसा नहीं कर सकती.. सदियों से मानव जाति से ही आपकी पहचान है पूरे सौर मंडल में।

पृथ्वी – क्या तुम्हें सच में ऐसा लगता है? यही कारण है कि तुम मेरा मोल ना समझ पाये। मूर्खों! हम सम पूरक थे, मानव जाति है क्यूँकी पृथ्वी पर वैसा वायुमंडल था जो तुम खत्म करने पर तुले हो।

प्रतिनिधि – तो क्या हम जीना छोड़ दे, विकास छोड़ दे?

पृथ्वी – नहीं! सदियों से मैंने कई प्रजातियों के विकास और विनाश की लीला देखी है यहां। बस सचेत रहना चाहिए विकास विनाश का कारण ना बन जाए।

प्रतिनिधि – समझ गए हम! हमे आपकी जरूरत है.. आपको हमारी नहीं।

पृथ्वी – ऐसा नहीं है, मैंने एक मां की तरह तुम्हें हर वस्तु उपलब्ध करायी, बस बदले में तुमने मेरा विश्वास छलनी किया।.. पर अब कुछ नहीं हो सकता है, देख लो कोई और ग्रह विनाश के लिए।

प्रतिनिधि – शायद अब कुछ ना हो सके क्यूँकी ग्रह नहीं हमे गृह चाहिए।

ये हकीकत नहीं पर हो भी सकता है अगर जल्द आंख ना खुली तो हमारी।

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0