Anshu Shri Saxena

Anshu Shri Saxena

 2 years ago

I am a writer blogger and poet. Writing is my passion. I am a travel enthusiast too

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कठपुतलियाँ

कमल नयन कटोरे भरे जल की बदली, जाने कितने हाथों से बँधी वो कठपुतली... रख दाँव पर अपने अस्तित्व व सम्मान को, नगरवधू बन वो मासूम चली...

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अपना छोटा सा कोना

ख़्वाबों का तकिया हो, ख़्वाहिशों का बिछौना... दिल ढूँढता है अक्सर, ऐसा अपना छोटा सा कोना !

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ससुरालमेंपहलादिन

आज भी ससुराल में अपना पहला दिन याद करती हूँ तो चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान खेल जाती है । सुबह सवेरे मेरी

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खुला आसमान

शादी का घर था । चारों ओर खूब चहल पहल थी । जैसे ही तानी की टैक्सी दरवाजे़ पर रुकी , सब तरफ़ शोर मच गया...देहरादून वाले चाचा आ गये....तानी...

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सच से बड़ा झूठ

रात ढल चुकी थी परन्तु संजना की आँखों से कोसों दूर थी । विनय भी तीन दिनों के लिए शहर से बाहर गये हुए थे । जब विनय घर पर न हों तो घर...

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नहीं भूलता वह दिन

अपने पहले पीरियड की याद करते ही सिहर उठती हूँ । यह वो ज़माना था जब, इस तरह की बातों को करना घरों में वर्जित समझा जाता था । उन दिनों...

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अविस्मरणीय पल

कल फ़ुरसत के चंद लम्हों में पुराने पड़े अल्बम को पलटने बैठी तो इस तस्वीर पर जाकर मेरी नज़रें ठहर गईं । यादों की पोटली से अनगिनत ख़ुशनुमा...

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ख़तों के सारे शब्द

मेरे घर की दुछत्ती पर, छोटी सी संदूकची में, रखे थे कुछ पीले से पड़ चुके, मुड़े तुड़े से ख़त.... जैसे हों ख़्वाब कई, पुरानी सी बूढ़ी...

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