Bhavna Thaker

Bhavna Thaker

 1 month ago

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स्त्री को महसूस करो

भोर की पहली दस्तक के संग दो पहियों   पर दौड़ती समय के सांचे में खुद को ढ़ालती स्त्री को कोई नहीं जानता। स्त्री की परछाई के पीछे चलकर...

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मेनोपोज़ समस्या नहीं

पैंतालीस साल की नीलम वैसे तो खुश मिज़ाज ओर हल्के फुल्के ख़याल वाली है, पर अचानक से कभी रोने लगती है, कभी बिना कोई बात के चिढ़ जाती...

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एक आधुनिक सोच भारतीय संस्कृति पर धब्बा

कुछ पल तो रुकती है ये सांसें भी  पैर भी थकते है चलो सिलवटों की मारी उम्र को इस्तरी करके रखते है  निरंतर बहती ज़िंदगी की आपाधापी में...

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अबला की पीड़

मैं गुमनामी की अंधेरी गुफाओं की खतरनाक सैर करते कतरा-कतरा कट रही थी उसके भूखे स्पर्श और लालसा सभर कृत्य मेरी जंधाओं को फ़ाड़ रहे थे,...

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मुझे भी हक है

सारे मेम्बर्स ये कहानी पढ़ें ओर अपने माँ-बाप को उनकी पिछली ज़िंदगी का पड़ाव खुशी खुशी काटने में उनकी सहायता करे।।

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मेरी खुशियों की बारिश

आज ट्रेन की रफ्तार बहुत धीमी लग रही है, मन करता है उड़ कर पहुँच जाऊँ बहुत समय बाद घर जा रहा हूँ इस बार तो माँ ओर भाभी ने धमकी जो दी...

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एक याद भरी पुरवाई

आज ठंड के कोहराम ने बीते कल पर दस्तक दी तुम्हारा मेरे जीवन की दहलीज़ पर दस्तक देना याद आ गया।वो भी झाड़ों का मौसम था सुबह पाँच बजे...

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कच्ची उम्र की भूल

उन्नीस साल की तानी के कदम ज़मीन पर नहीं पड़ रहे थे सहेलियों से सिर्फ़ पहले प्यार के एहसास के किस्से सुने थे पर आज तानी को महसूस हो...

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स्त्री का वजूद

स्त्री सृष्टि की संचालिका है स्त्री के वजूद से ईश रचता है संसार, स्त्री के अस्तित्व से संगीत बहता है जिसकी लयबद्ध ध्वनि से सारी ऋचाएँ...

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अजन्मी अंतिमा

मत उम्मीद रखो मुझसे की मेरी ज़िंदगी का अनुवाद तुम्हारी भावनाओं से जुड़ा हो"मैं जन्मी हूँ एक छोटी सी अदम्य आक्रोशित  कहानी के लिए"...

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