Deepika Raj Solanki

Deepika Raj Solanki

 12 days ago

मैं वह रेत हूं जो मुट्ठी में बंद नहीं हो सकती, प्यार से पुकारोगे तो दुश्मनों की भी दोस्त बन सकती। अपने को मैं लिखकर ही संवार सकती।

Member since Apr 18, 2020 dc[email protected]

हाँ मैं बेटी न बन पाई पर कभी न डगमगाई।।

त्याग सब उसकी ही झोली में क्यों जाते?   डोली में बैठा मायके का पराया धन,    पराया ही समझ कर घर अपने लाते,    माथे में सिंदूर लगते...

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क्षितिज-मिलन का भ्रम

क्रिकेट खेलते समय गेंद कोठी के परिसर में चली गई। कोठी के चौकीदार को कई सालों से रोहित और रोहित के दोस्त जानते थे अतः बिना हिचकिचाहट...

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नैना देवी महोत्सव की सुनहरी यादें

अपने शहर से जुड़ी यादों की बात करें तो नैनीताल में होने वाले नंदा देवी मेले को नहीं बुलाया जा सकता है। बचपन की हम पांच बहुत ही करीबी...

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ज़ायके आगरा के

यहां परोसे जाने वाले शाकाहारी तथा मांसाहारी व्यंजनों को बनाने में परंपरागत मसालों व विधि का प्रयोग किया जाता है, जिस कारण व्यंजनों...

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वह मुक्तेश्वर की रामलीला

मेरे पिताजी की जन्मभूमि तथा कर्म भूमि मुक्तेश्वर रही। मेरे पिताजी के साथ साथ मेरे बचपन के दोस्त, सखियां के पिताजी भी वेटरनरी इंस्टिट्यूट...

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सबके मन को जो भाए , आगरा का पेठा कहलाए

उत्तर भारत के प्रसिद्ध व्यंजन में पेठे की मिठाई का अपना एक विशेष स्थान रहा है, उत्तर प्रदेश में आगरा पेठे के लिए विश्व प्रसिद्ध है।...

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एक शाम ताज महोत्सव के नाम

"ताज महोत्सव" अपने आप में आगरा की अद्भुत व रोचक पहचान बन चुका है। जिस प्रकार से ताजमहल खूबसूरती के लिए विश्वव्यापी प्रसिद्ध अद्भुत...

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चूड़ी ,कंगन, लाली, सिंदूर से सजी मैं, तेरी...

तलब  इतनी -सी , कि तेरे घर में, मैं बस अपना सा, एक सुकून -ए -आशिया चाहती हूं, चूड़ी ,कंगन, लाली, सिंदूर से सजी मैं, तेरी संगिनी कहलाना...

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ताजमहल -मेरे शहर की स्वर्णिम पहचान

है किनारे ये जमुना के इक शाहकार देखना चांदनी में तुम इसकी बाहर याद - ए -मुम्ताज में ये बनाया गया संग-ए-मरमर से इसको तराशा गया

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तीन रंग का तिरंगा अपना

हम सब अपने  में इतराएं- इठलाएं , तिरंगे के आगोश में वीर जब सो जाएं, हर जन्म में भारतीय होने का गौरव वह पाएं,

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