Niitu Khetan

Niitu Khetan

 2 years ago

Member since Mar 26, 2020

क्या...नहीं है घर में मेरे, ऐसा कोई छोटा...

कोना कोना कोना कोना क्या है कोना..... घर हो एक मेरा अपना एक कोना ना चाहूँ सजना

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मैं अक्सर चुप रहती हूँ

शायद कभी सुना नहीं मुझे या.... सुनना नहीं चाहा कभी मुझे  हाँ....मैं अक्सर चुप रहती हूँ 

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कोरोना

कोरोना कोरोना कोरोना  तंग तुम हमें अब करो ना क्यूँ अपनी जिद पे अड़े हो सारी दुनिया के पीछे पड़े हो

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भुतहा हवेली -एक अन्धविश्वास

कहानी एक हवेली की जो गाँव से थोड़ी दूर पर थी लेकिन इतनी दूर भी नहीं कि खास कर वहाँ जाने पर ही दिखाई दे। अक्सर पास के बाजार में आते-जाते...

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सब्र

बहती हुई गर्म हवाओं से पूछा- बादलों को देखा है कहीं ? बहुत दिन हुए। उससे जल्द आने कहना। शाम को वापस पेड़ों पर लौटे पंरिदों का अब शोरगुल...

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इंतजार

एक शाम मैं यूँ ही एक क्लब के कार्ड्स रूम में बैठी थी ।वहाँ रखे खुबसूरत से गोल्डन प्लेइंग कार्ड्स के साथ अकेले में गुफ्त-गु करते हुए...

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