Priyanka daksh

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बुरा ना मानो होली हैँ

चाची मैं बाहर दोस्तों के साथ होली खेलने जा रही हूँ, आप चाचू को बता देना ".. "जल्दी अजाना कुहू, और ध्यान भी रखना अपना ".. "ओके चाची...

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रंग तेरे प्यार के

ये क्या कीर्ति दी! आज शादी के बाद आपकी पहली  होली हैं,और आप ऐसे मुँह लटकाये बैठे हो ".. "जीजू नहीं आये तो मन उदास हैं ना आपका ".....

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अगर उनकी माँ कि सोच भी ऐसी होती तो

"बेटियां तो माँ दुर्गा, काली, लक्ष्मी कर स्वरुप होती हैँ. जिस घर बेटियां होती हैँ उस घर में हमेशा खुशियाँ रहती हैँ । लेकिन आज भी कुछ...

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नहीं चाहिए ऐसे रिश्तेदार

हम अपनों के बीच ख़ुद को कितना सहज़ और सुरक्षित महसूस करते हैँ, सबका साथ हमें हर तरह की परिस्थिति से लड़ने में मदद करता हैँ । लेकिन क्या...

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"बहन मैं हूँ ना तेरा बड़ा भाई "

एक औरत के लिए अकेले सब करना मुश्किल हो जाता हैं लेकिन जब अपनों का साथ मिल जाये तो सब मुश्किल आसान हो जाती हैं, खासकर परिवार का.....कुछ...

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परम्परा के नाम पर ऐसी ज़्यादती क्यों

सच है ना एक औरत शादी के बाद अपने पति के लिए सजती सवंरती है,श्रृंगार करती है... ये कुछ ऐसी परम्परा ही ऐसी बनी हुई है... किन्तु कभी...

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"ख़ुद से प्यार करने लगी हूँ मैं "

हाँ जी!अब सजने सवरनें लगी हूँ मैं,ख़ुद से प्यार करने लगी हूँ,

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