Saroj Pawan

Saroj Pawan

 2 days ago

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कृष्णा सोबती- भारतीय हिंदी साहित्य की सशक्त...

हिंदी साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर कृष्णा सोबती जी का जन्म गुजरात में 18 जनवरी 1925 को हुआ था। विभाजन के बाद गुजरात का यह क्षेत्र पाकिस्तान...

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चीफ की दावत....एक करारा व्यंग्य आधुनिक खोखले...

चीफ की दावत' में हमारे मध्यमवर्गीय समाज में पांव पसारते खोखलेपन, दिखावटीपन व रिश्तो  को अपने स्वार्थ पूर्ति हेतु  उपयोग को दिखाया...

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हिंदी भाषा मेरी पहचान

फ्लावर नहीं मम्मी फ्लार कहते हैं।" मिष्टी अपनी मम्मी को टोकते हुए बोली। "हमें तो ऐसा ही परनाऊंश करना सिखाया था, हमारी  टीचर्स ने।"...

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मेरी प्राइमरी अध्यापिका

आज भी सरिता को याद है । दादी और दूसरे लोग, काले रंग  और साधारण नैन नक्श के कारण उसे पास नहीं फटकने देते थे। कोई बच्चा उसके साथ नहीं...

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मेरे दोस्त

पहिया उम्र का यह कभी आगे बढ़ने नहीं देते                बचपन कभी ये मिटने नहीं देते वक्त को लेते हैं जो थाम            ऐसे ही जिद्दी...

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छिछोरे-कोशिश करना महत्त्वपूर्ण है

इस फिल्म की जान है, इसकी स्टोरीलाइन। जी हां, इस फिल्म को देखते हुए, जहां आप अपने कॉलेज के दिनों को एक बार फिर भी जी उठोगे

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हास्य द्वारा महत्वपूर्ण संदेश देती फिल्म...

आज मैं ,आपके समक्ष लेकर आई हूं 1968 में आई फिल्म तीन बहूरानियां। इस फिल्म को मैंने लॉकडाउन पीरियड में देखा था। सच मानो देखकर लगा ही...

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छुपा खजाना

बात उन दिनों की है जब मैं टीचर ट्रेनिंग कर रही थी। पहले दिन ही मेरी मुलाकात रेनू से हुई।वह बहुत ही सरल व सीधी   स्वभाव वाली लड़की...

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मेरा प्यारा भाई

हमेशा मेरी उंगली पकड़े रखता। अपनी चीजें हमेशा मुझसे शेयर करता। मेरी हर प्रॉब्लम वह चुटकी में सुलझा देता है।

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मम्मी, मेरे भाई अब बड़े हो गए हैं

कल रक्षाबंधन है लेकिन रागिनी का मन उदास था। तभी उसकी मम्मी का फोन आया फोन उठाते ही  रागिनी ने पूछा "कैसी हो मम्मी ! आप ठीक हो ना!"...

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