Sumedha Sisodia

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 2 years ago

Member since Apr 6, 2020

ओ होलियारन कहाँ गई?

ओ होलियारन कहाँ गई, ओ होलियारन कहाँ गई...स्टोर में गुझिया का सांचा लेने गई फाल्गुनी के कानों में बार-बार ये आवाज़ आ रही थी आश्चर्यचकित...

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मैं अलबेली, रंगो की सहेली

बोलो जोगीरा सारा रारा जोगीरा सारा रारा शांत -शांत से हम फागुन में देखें खुद में नयी तरंग न भंग न धतूरा भईया हम पर तो चढ़े फाग का रंग...

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मतलबी चुप्पी

कांति भाभी, कांति भाभी कहाँ हो पड़ोस वाली चाची जी घबराहट  में मम्मी को पुकारती हुई कमरे में आकर बैठ गईं।क्या हुआ निर्मला ?

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ये चुप्पी की चुनर क्यों उढ़ाई?

कई बार हम खुद तो बोलते हैं लेकिन हमारा साथ देने वाली कोई आवाज़ नहीं आती तब विवशता की चुप्पी हमें ओढ़ा दी जाती है

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गुलाबी एहसास

प्रिय पिंक मंच, जिक्र-ए-गुलाबी आते ही रंगत गुलाबी हो जाती है, तुम्हारे नाम ये मेरी पहली पाती है..... 'हैल्लो दी आपको मैंने एक ग्रुप...

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जीवन के रंग

सम्मान पाना किसे अच्छा नहीं लगता मुझे भी कई अवार्ड मिले हैं जिनसे सम्बंधित तस्वीरों और वस्तुओं को देखकर आज भी बहुत खुशी होती है लेकिन...

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राही किस ओर चला....

राही किस ओर चला क्षितिज एक छलावा है.... क्षितिज के उस पार क्या है किसी ने न जाना है, सारे लक्ष्य हैं इस पार ही उस पार तो विराना है,...

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मन की खिड़की खोल दे...

अकेले दौड़ने वाले जीतेगा किससे ? जब कोई और दौड़ने वाला ही न होगा, जीत की खुशी आयेगी कैसे तेरे हिस्से, आगे बढ़ने वाले को गिराने का हुनर...

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यादों के अलाव

फुर्सत के पलों में गुनगुनी धूप में बैठे हों तो अक्सर पुरानी यादों का पिटारा खुल जाता है। और चंचल मन अतीत में न जाने कहाँ-कहाँ तक झाँक...

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होइहि सोइ जो राम रचि राखा

2020 एक बहुत ही उतार चढ़ाव से भरा हुआ वर्ष रहा है। पीछे मुड़कर देखती हूँ तो डर और सुकून के मिले-जुले एहसास उभरकर आते हैं। कोरोना की...

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