पता ही नहीं चला दिन कहां गुज़र गया

पता ही नहीं चला दिन कहां गुज़र गया

जनवरी में हमारी इंगेजमेंट हुई और साथ ही जून की छुट्टीयों में शादी की डेट भी फिक्स हो गई। उन दिनों मोबाइल फोन इतना पॉपुलर नहीं था लैंडलाइन फोन ही होते थे घरों में।इसलिए जब भी  हमारी बात होती तो घर का कोई न कोई शख़्स मौजूद होता । बेहद फॉर्मल बात होती । फिर भी हम एक-दूसरे को समझने लगे थे।एेसे ही शादी का टाइम नज़दीक आ गया ।
   

जून का महीना शिद्दत की गर्मी और वनडे मैरिज ।विदाई होते-होते शाम के छः बज चुके थे।160 किमी का सफ़र तय करना था । यूँ तो  मुझे सफ़र की आदत थी मगर  दुल्हन बनी ,झुका सिर  सफ़र बहुत लंबा लगा।तीन घण्टे का पहाड़ी रास्ता तय कर बारात तराई पहुँची, फिर दो घण्टे का सफ़र कुछ आसान लगा।पहाड़ों से मोड़ अब नहीं थे।रात  ग्यारह बजे  लगभग हम लोग ससुराल पहुँत गए।

 दुल्हन के स्वागत की कुछ रस्में हुई और फिर सब लोग आराम करने चल दिए ।  रिसेप्शन एक दिन बाद रखा गया था लिहाजा एक दिन कैसे गुजरेगा मैं सोच रही थी ।सुबह नाश्ते के बाद ये मुझे बोले चलो आओ अपना घर देखो ।इनका घर काफी बड़ा था । मैं मन ही मन सोच रही थी कि शादी का घर और इतना व्यवस्थित।कहीं भी कुछ एडजस्ट नहीं किया था ।सब अपनी जगह का़यदे से रखा हुआ।मेहमान भी थे पर पता नहीं चल रहा था ।

फिर ये मुझे लेकर अपमे मम्मी-पापा के रूम में गए।मैंने दोनों को आदाब अर्ज़ किया ।मेरे सिर पर हाथ रखकर उन्होंने मुझे अपना  आशीर्वाद दिया । मेरे ससुर जी को मुझ में जाने एेसा क्या दिखा कि उन्होंने पहली बार में ही मुझसे बोला - बेटी!मुझे उम्मीद है कि हमारे बाद तुम हमारे नाम का दिया रोशन करोगी । वो हमेशा मुझे बेटी कहकर ही पुकारते  कभी नाम से नहीं पुकारा । यूँ तो उनकी हर बात बहुत याद आती है पर पहले दिन के ये शब्द मेरे ज़हन में अब भी ताज़े हैं।  

कुछ देर उनके पास बैठकर हम वापिस कमरे में आ गए थे। लंच के बाद मैं सो गई ।शाम को तैयार होकर बैठी तो इनकी कज़न्स ने घेर लिया ।मेहमान भी आ-जा रहे थे।कोई कुछ पूछता  कोई कुछ यूँ कहूँ की नई दुल्हन से बात करने के सब अपने-अपने तरीके ढूँढ रहे थे।मैं कभी जवाब दे देती और कभी सिर्फ मुस्करा जाती।

शाम को ही इन्होंने विडियोग्राफी के लिए  कैमरा मैन को बुला रखा था और अब वह आ चुका था । उसने मूवी बनाना स्टार्ट की और पहली बार किसी के बताए पॉजे़ज़ को हम दोनों फॉलो करते हुए  एक ख़ूबसूरत अहसास को महसूस कर रहे थे।

डॉ यास्मीन अली
#ससुराल में  मेरा पहला दिन
#thepinkcomradecontestofthemonth
#Thepinkcomrade
#pinkcomrade

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
2
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0