पुन:कन्यादान

पुन:कन्यादान

तेजस्वनी जी गहन विचार में डूबी हुयी किसी के आने का इंतजार कर रही थी कि अचानक से एक पहचानी सी आवाज़ ने उनका ध्यान भंग   कर  दिया, "नमस्ते आंटी! कैसी है आप? "  अपने स्वभाव के अनुरूप सिर हिला कर जवाब दे बोली, "देखो आदित्य! तुमसे मै पहले भी कह चुकी हूं कि तुम जो चाहते हो वह गलत है और मै ऐसा कभी नही होने दूंगी ।"

"गलत क्या और क्यूं है आंटी? आलोक मेरा बहुत अच्छा दोस्त था इस नाते मै आपकी बहुत ज्यादा इज्जत करता हूं, पर मै आप जैसी आत्मनिर्भर और हिम्मती महिला से जानना चाहता हूं कि पूर्णिमा और मेरे रिश्ते में आपको क्या गलत लगता है? " पूर्णिमा, तेजस्वनी जी की बहु थी, जो कि दुर्भाग्य से तीन साल से वैधव्य में अपना जीवन काट रही थी। "बात रिश्ते के गलत होने की नही है और ना ही तुम मेरे लिए अंजान हो, बस बात इतनी सी है कि मेरी बहु बहुत बहादुर है और उसे अपना जीवन काटने के लिये किसी के साथ की ज़रूरत नही है। वह मेरे साथ खुश है। "  

"मै कहाँ कह रहा हूं कि वो कमजोर है, इनफैक्ट मेरा मानना तो यह है कि हर स्त्री मज़बूत है।मज़बूत होती है नारी तभी तो केवल माँ -बाप के निर्णय पर अपना घर छोड़ किसी ओर के साथ जन्म जन्मान्तर का वादा कर रहने चली आती है और वही की होकर रह जाती है।हम पुरुष नही कर सकते यह।

पर आप यह क्यूं सोच रही है कि मै उस की परिस्थिति पर तरस खा कर उससे विवाह कर रहा हूं।यह समाज आज भी इतना रुढिवादी क्यो है कि पुरूष के अकेले होते ही, सब मिल उसके लिये पुनः जीवनसाथी ढूढने लगते है, परन्तु स्त्री के सामने जब यही परिस्थिति आती है तो पूरा समाज उसे ये समझाने में लग जाता है कि वो मजबूत है, हालात का सामना कर लेगी।

आखिर क्यो सब  उसके संघर्ष को अनदेखा कर बार -बार उसे यह अहसास दिलाते है कि यही उसकी नियति है,उसे जीवन जीना भूलकर प्रतिपल उससे लड़ना है।आंटी! मै आपकी भावनाओं को ठेस नही पहुंचाना चाहता पर आप से ज्यादा इस अकेलेपन को कोई नही समझ सकता।"  'अकेलापन! 'सही तो कहा आदित्य ने, पूर्णिमा से भी कम उमर थी उसकी जब आलोक के पापा उसे और अपने दोनो बच्चो को छोड़कर चले गये थे।अपने जीवन का पूरा संघर्ष उसकी आँखो के सामने तैर गया।

और उसी संघर्ष में एक चेहरा और शामिल होता दिखा, उसकी अपनी पूर्णिमा का, जिसके चेहरे का चाँद निस्तेज हो गया था। "चलती हूं मै अब।"   "पर आंटी! आपका जबाब?? "   "बेटी की माँ हूं, कन्यादान की तैयारी करनी है मुझे, तुम तो बस बारात लाने की तैयारी करो।"  "थैंक्स आंटी।" तेजस्वनी जी के अंदर बहुत समय बाद एक नयी उर्जा का संचार हुआ था।

(मौलिक रचना) 

#प्राची चतुर्वेदी 

#पुन:कन्यादान

#the_pink_comrade

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