पंजाबी शादियों में चूड़ा और कलीरा पहनने का क्या है रिवाज़...

 पंजाबी शादियों में चूड़ा और कलीरा पहनने का क्या है रिवाज़...

हरी-हरी , लाल-लाल चूड़ियाँ जहाँ शृंगार का एक खास पहलू होती हैं, वहीं महिलाओं की सुंदरता को बढ़ाने में अहम भूमिका भी निभाती हैं । चूड़ियों की खनक बहुत शुभ मानी जाती है । भारतीय संस्कृति में तो चूड़ियों का महत्व भी बहुत ज्यादा है। दुल्हन की चूड़ियों की खनक को घर की रौनक बताया जाता है। काँच की चूड़ियाँ किसी भी दुल्हन के सौंदर्य में चार चाँद लगा देती है परंतु आपने देखा होगा कि पंजाबी शादियों में तो शादी के समय लाल चूड़ा पहनने का रिवाज़ है । पंजाबी वेडिंग में ही क्यों आज तो यह प्रचलन इतना ज्यादा बढ़ गया है कि जहाँ पर शादियों में चूड़ा नहीं पहनने का रिवाज था, वहाँ भी अब जुड़ा जरूर पहना जाता है ।

तो चलिए आज बात करते हैं कि पंजाबी शादियों में चुड़ा पहले का रस्मो-रिवाज क्या है , क्यों पहनती है पंजाबी दुल्हन चूड़ा और साथ ही आपने दुल्हन के हाथों में कलीरे भी बँधे हुए देखे होंगे । उनको बाँधने का, पहनने का क्या रिवाज़ है , यही हमारा आज का विषय रहेगा…..

पंजाबी शादियों में चूड़े का महत्व-

शादी के दिन दुल्हन के सोलह शृंगार किए जाते हैं। ढेर सारी सुंदर ज्वैलरी से सजी होती है दुल्हन । मगर इस सारे शृंगार में सबसे अधिक अगर कुछ महत्व रखता है तो वह है 'चूड़ा' ….

शादी वाले घर में चूड़ा और कलीरा सेरेमनी अलग से रखी जाती है । दुल्हन को चूड़ा उसके मामा के घर से का ही पहनना होता है यानि मामा दुल्हन के लिए चूड़ा लेकर आते हैं । पूरे शगुनों - रस्मो रिवाज़ के साथ दुल्हन को यह चूड़ा पहनाया जाता है । आजकल ऐसा भी हो जाता है कि मामा ने दुल्हन को पैसे दिए और दुल्हन अपनी पसंद से अपना चूड़ा खरीद लाती है लेकिन चूड़ा मामा के घर का ही होता है । शादी में जितना महत्व मंडप के सजने का है, उतना ही महत्व दुल्हन के हाथों में चूड़ा सजने का है।

पंजाबी परिवारों में पूरे एक साल तक चूड़ा पहनने का. रिवाज़ होता है। हालांकि आज-कल तो दुल्हनें 40 दिनों तक ही इसे पहनती हैं। चूड़ा, शादी शुदा होने का प्रतीक माना जाता है। साथ ही प्रजनन और समृद्धि का संकेत भी इसे कहा गया है। नवविवाहिता पति की भलाई के लिए भी इसे पहनती है।

शादी के मंडप में ही मामा द्वारा दुल्हन को चूड़ा दिया जाता हैं। इस दौरान दुल्हन की आँखें उसकी माँ बंद कर देती हैं, जिससे वह चूड़े को ना देख पाए , कहीं खुद की ही नज़र  चूड़े को न  लग जाए । एक रात पहले चूड़े को दूध में भिगोकर रखा जाता है। 

पंजाबी शादियों में कलीरे का महत्व-

पंजाबी शादियों में आपने दुल्हन के हाथ में चूड़े के साथ कलीरे भी बँधे हुए देखे होंगे । गोल्डन रंग के लंबे-लंबे, सुंदर-सुंदर लटकते हुए कलीरे । जी हाँ…. दुल्हन की सुंदरता में चार चाँद लगाने में इनकी भी अहम भूमिका है । पंजाबी शादियों में कलीरा सेरेमनी भी अलग से होती है । 

क्या आप जानते हैं कि यह कलीरा सेरेमनी क्यों की जाती है …. शादी में चूड़े के साथ कलीरे भी दुल्हन के हाथों में बाँधे जाते हैं। दुल्हन इन कलीरों को अपनी अविवाहित बहनों-दोस्तों के ऊपर झटकती है । कहा जाता है कि ऐसा करने से उनका विवाह भी जल्दी होता है, समय पर होता है। शादी में किसी तरह की कोई अड़चन नहीं आती । ऐसा भी कहा जाता है कि जिसके ऊपर सबसे पहले यह कलीरा टूटकर गिरता है उसी का अगला नंबर होता है ।

दोस्तों जरूर बताएँ कैसा लगा आपको यह पंजाबी शादी अटेंड करके , यह जानकारी प्राप्त करके ?

मधु धीमान 





 

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