Queen Bee Syndrome – क्या आप इस सिंड्रोम को जानती हैं ?

Queen Bee Syndrome – क्या आप इस सिंड्रोम को जानती हैं ?

इस सिड्रोम के बारे में जानने से पहले ,बात करते हैं महिलाओं की दिनचर्या के बारे में। शादी के बाद एक महिला का जीवन जितना बदलता है , उतना किसी का नहीं , नया परिवार ,नया माहौल और एक नयी ज़िंदगी। इस नयी दिनचर्या को आसान बना सकतीं हैं , पहले से घर में मौजूद अन्य महिलाएं जैसे सास , ननद , जेठानी। अफ़सोस 90 प्रतिशत महिलाओं को ससुराल में ये सपोर्ट नहीं मिल पाता। ऐसा क्यों होता है , क्या इसका कारण आप जानते हैं ?

इसका जवाब है ” Queen Bee सिंड्रोम ! इसका अर्थ है ” जिन महिलाओं के पास कार्य को सँभालने के अधिकार मौजूद हैं , वे घर या कार्यस्थल में प्रवेश करने वाली नयी महिला सदस्य के साथ अनुचित व्यवहार कर उन्हें छोटा महसूस कराने प्रयास करती हैं ! वे खुद तो अपने कार्य में काफी सफल होती हैं , मगर किसी अन्य सहकर्मी महिला को आगे बढ़ते नहीं देख पाती और परिणाम स्वरुप उनके साथ उचित व्यवहार नहीं करतीं।

Queen bee syndrome was first defined by G.L. Staines, T.E. Jayaratne, and C. Tavris in 1973.[1] It describes a woman in a position of authority who views or treats subordinates more critically if they are female.

हालाँकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ये रिसर्च ऑफिस में कार्यरत महिलाओं पर की जाती है की कैसे ऊँचे पद पर कार्यरत महिलाएं , बाकि सहमहिला कर्मचारियों से गलत व्यवहार करतीं हैं और कड़वे शब्दों का उपयोग करतीं हैं। नतीजन लगातार नकारात्मक व्यवहार के चलते ज़्यादातर महिलाएं काम छोड़ देतीं हैं।

कुछ सर्वे इस रीसर्च को गलत भी साबित करते हैं और दर्शाते हैं की कैसे महिलाएं एक दूसरे का साथ देतीं हैं आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। मगर आंकड़ों की गर बात की जाए तो यूनिवर्सिटी ऑफ़ ARIZONA की तीन रिसर्च में पाया गया है ” की पुरुष कर्मचारियों की तुलना में महिलाएं ज़्यादा उपेक्षित और बुरा व्यवहार करती हैं अपने से छोटे पद पर कार्यरत महिलाओं के साथ।

इसका कारण , वर्चस्व खो देने का भय और अन्य निजी परेशानियां हो सकतीं। इसे ही कहते हैं “Queen Bee सिंड्रोम” , भारतीय परिवेश में ये समस्या कार्स्थल तक सीमित नहीं है , घरेलु परिवेश में ज़्यादा प्रबल है। जहाँ घर की महिलाएं एक दूसरे से द्वेष की भावना रखती हैं।

कुछ बातों का ध्यान रखकर आप इससे उबर सकतीं हैं –

ऑफिस या घर में साथ अन्य छोटी महिला को भावनात्मक सपोर्ट ज़रूर करें।

हर काम को आपस में बाटें , किसी एक महिला पर काम का बोझ ना पड़े।

अगर आप उम्र और औधे में बढ़ीं हैं , तो घर या ऑफिस में काम करने वाली उम्र और औधे में छोटी महिलाओं को सपोर्ट करें।

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