रक्षा बंधन त्योहार का महत्व और उसके पीछे छुपी कहानियाँ

रक्षा बंधन त्योहार का महत्व और उसके पीछे छुपी कहानियाँ


हर त्योहार का एक महत्व होता है और उसके पीछे कोई न कोई कारण छुपा होता है। आज भी हम सारे त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाते तो है, पर क्या आजकल की पीढ़ी सारे त्योहार के पीछे छुपी वजह और महत्व जानती है?

श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का त्‍योहार भाई बहन के प्‍यार का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती है और उनकी दीर्घायु और सुख समृद्धि की कामना करती है, बदले में भाई, अपनी बहनों की हर प्रकार के अहित से रक्षा करने का वचन उपहार के रूप में देते हैं।


राखी का त्योहार सदियों से मनाया जा रहा है कहा जाता है कि मध्‍यकालीन भारत में जहां कुछ स्‍थानों पर, महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती थी, वे पुरूषों को अपना भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधती थी। इस प्रकार राखी भाई और बहन के बीच प्‍यार के बंधन को मज़बूत बनाती है। इस त्योहार से जुड़े कई वाकिए हमारे पौराणिक ग्रंथो में पाये गए है जो इस त्योहार के महत्व को बखूबी समझाते है उनमें से कुछ इस प्रकार है।


राखी से जुड़ी एक सुंदर घटना का उल्लेख महाभारत में मिलता है। यह घटना दर्शाती है कि भाई-बहन के स्नेह के लिए उनका सगा-सहोदर होना जरूरी नहीं है। कथा ये है कि जब युधिष्ठिर इंद्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ कर रहे थे उस समय सभा में शिशुपाल भी मौजूद था। शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किया तो श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया। लौटते हुए सुदर्शन चक्र से भगवान की छोटी उंगली थोड़ी कट गई और रक्त बहने लगा। यह देख द्रौपदी आगे आईं और उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर लपेट दिया। इसी समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि वह एक-एक धागे का ऋण चुकाएंगे। इसके बाद जब कौरवों ने द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया तो श्रीकृष्ण ने चीर बढ़ाकर द्रौपदी के चीर की लाज रखी। कहते हैं जिस दिन द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई में साड़ी का पल्लू बांधा था वह श्रावण पूर्णिमा की दिन था। तब से श्रावण पूर्णिमा का दिन रक्षा बंधन के नाम से मनाया जाता है।


दूसरी कथा कुछ इस प्रकार है, सिकंदर पूरे विश्व को फतह करने निकला था और जब भारत आया तो यहां उसका सामना भारतीय राजा पुरु से हुआ। राजा पुरु बहुत वीर और बलशाली राजा थे, उन्होंने युद्ध में सिकंदर को धूल चटा दी। इसी दौरान सिकंदर की पत्नी को भारतीय त्योहार रक्षाबंधन के बारे में पता चला। तब उन्होंने अपने पति सिकंदर की जान बख़्शने के लिए राजा पुरु को राखी भेजी। पुरु आश्चर्य में पड़ गए, लेकिन राखी के धागों का सम्मान करते हुए उन्होंने युद्ध के दौरान जब सिकंदर पर वार करने के लिए अपना हाथ उठाया तो राखी देखकर ठिठक गए और बाद में बंदी बना लिए गए। दूसरी ओर बंदी बने पुरु की कलाई में राखी को देखकर सिकंदर ने भी अपना बड़ा दिल दिखाया और पुरु को उनका राज्य वापस कर दिया। ये घटना रक्षा बंधन के महत्व का मान बढ़ाती है।


(येन बद्धो बलि राजा,दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:) रक्षा बांधते वक्त बोले जाने वाले इस मंत्र का महत्व समझाते वामन पुराण, भविष्य पुराण और विष्णु पुराण में एक कथा भी मिलती है।

और कहा जाता है कि रक्षा बंधन की शुरुआत कुछ यूं हुई राजा बली बहुत दानी राजा थे और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त भी थे। एक बार उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। इसी दौरान उनकी परीक्षा लेने के लिए भगवान विष्णु वामनावतार लेकर आए और दान में राजा बलि से तीन पग भूमि देने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने दो पग में ही पूरी पृथ्वी और आकाश नाप लिया। इस पर राजा बलि समझ गए कि भगवान उनकी परीक्षा ले रहे हैं। तीसरे पग के लिए उन्होंने भगवान का पग अपने सिर पर रखवा लिया। फिर उन्होंने भगवान से याचना की कि अब तो मेरा सबकुछ चला ही गया है, प्रभु आप मेरी विनती स्वीकारें और मेरे साथ पाताल में चलकर रहें। भगवान ने भक्त की बात मान ली और बैकुंठ छोड़कर पाताल चले गए। उधर देवी लक्ष्मी परेशान हो गईं। फिर उन्होंने लीला रची और गरीब महिला बनकर राजा बलि के सामने पहुंचीं और राजा बलि को राखी बांधी। बलि ने कहा कि मेरे पास तो आपको देने के लिए कुछ भी नहीं हैं, इस पर देवी लक्ष्मी अपने रूप में आ गईं और बोलीं कि आपके पास तो साक्षात भगवान हैं, मुझे वही चाहिए मैं उन्हें ही लेने आई हूं। इस पर बलि ने भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ जाने दिया।


तभी से इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, उन्हें मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करती हैं और अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। राखी बांधने से पहले उनकी आरती उतारने के लिए सुंदर सी थाली सजाती हैं। भाई भी राखी बंधवाने के बाद अपनी बहनों को वचन देने के साथ ही कोई तोहफा व लिफाफा भी देते हैं। इसी तरह हंसी-खुशी से परिवार के सभी सदस्य साथ मिलकर राखी के त्योहार को मनाते हैं।


(भावना ठाकर, बेंगुलूरु) #भावु

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