रंग नहीं,गुण देखो

रंग नहीं,गुण देखो

रुचि की शादी को 7 महीने हो गए थे और उसके मामा मामी उसे बहुत दिनों से खाने पर बुला रहे थे। लेकिन चाह कर भी वह उनके पास जाने का समय नहीं निकाल पा रही थी। इस संडे उसने मामा मामी को फोन करके कह दिया था कि वह दोनों खाने पर आ रहे हैं। रुचि का आना जाना अपनी नानी के घर लगा रहता था । उसकी अपनी छोटी मामी से बहुत बनती थी। रुचि की मामी शोभा  पढ़ी-लिखी व मिलनसार स्वभाव की थी ।

इसके विपरीत उसकी नानी काफी गुस्सैल स्वभाव की और हमेशा बहुओं पर रौब जमाती रहती । दूसरी दोनों बहुएं तो पलट कर उन्हें जवाब भी दे देती लेकिन शोभा कभी भी उन्हें कुछ नहीं कहती। कई बार रुचि उसे कहती भी कि “आप क्यों नानी की सारी बातें सुनती हो।” तब शोभा यही कहती “जब तुम्हारी नानी किसी बात को समझना ही नहीं चाहती तो कुछ भी कहने से क्या फायदा।” अब नानी तो नहीं रही लेकिन शोभा व रुचि में आपस में अब भी बहुत प्रेम था।

इसके विपरीत उसकी नानी काफी गुस्सैल स्वभाव की और हमेशा बहुओं पर रौब जमाती रहती । दूसरी दोनों बहुएं तो पलट कर उन्हें जवाब भी दे देती लेकिन शोभा कभी भी उन्हें कुछ नहीं कहती। कई बार रुचि उसे कहती भी कि “आप क्यों नानी की सारी बातें सुनती हो।” तब शोभा यही कहती “जब तुम्हारी नानी किसी बात को समझना ही नहीं चाहती तो कुछ भी कहने से क्या फायदा।” अब नानी तो नहीं रही लेकिन शोभा व रुचि में आपस में अब भी बहुत प्रेम था।

संडे को शोभा ने सारी तैयारी कर ली थी। दोपहर को वह समय पर पहुंच गई। शोभा ने बहुत गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। रुचि भी इतने दिनों बाद अपनी प्यारी मामी से मिल बहुत खुश थी। बच्चे तो रुचि से ऐसे चिपक गए थे कि मानो कितने वर्षों बाद मिले हो। जब भी वह अपनी नानी के घर जाती तो वह  दोनों बहन भाइयों का बहुत ध्यान रखती थी। नानी ने तो कभी भी बच्चों को जिम्मेदारी नहीं ली। खाने की टेबल पर रुचि के पति ने खाने की बहुत तारीफ की। खाने के बाद रुचि के पति तो मामा के साथ बातों में लग गए। शोभा रुचि को अपने साथ अंदर ले गई और बोली ” अब बताओ रुचि हमारे जमाई राजा कैसे हैं! तुम्हारा ध्यान तो रखते हैं ना!” ” अरे मामी यह तो मेरे दिवाने है। बहुत ध्यान रखते हो मेरा।” ” तू है ही इतनी प्यारी।” ” और बता तेरी सासु मां कैसी हैं। उनका स्वभाव कैसा है।” ”  बहुत अच्छी हैं।” ” और घर का कामकाज तो तुम सही से कर लेती हो ना।” ” कहां मामी! अभी तक मेरी सास ने मुझे रसोई में जाने ही नहीं दिया। कहती है बहू उम्र भर तुम्हें काम ही करना है। यह शुरू के दिन ही होते हैं घूमने फिरने व एक दूसरे को समझने के। अभी तक तो मैं हर संडे किसी न किसी रिश्तेदार के यहां डिनर पर ही जा रही हूं। तभी तो यहां आने में इतना समय लगा।

“अरे वाह !बड़ी किस्मत वाली है हमारी रुचि । जो उसे इतनी अच्छी सास मिली। जो उसे इतना प्यार करती है।” ” सास क्यों तुम्हारी भांजी भी तो अच्छी है। उनके घर में सबसे सुंदर बहु मैं ही हूं। गली मोहल्ले से जब भी कोई आता है तो मेरी तारीफ करते नहीं थकते। और लाड़ की तो तुम पूछो मत मामी! वो हम दोनों से इतना करती हैं कि खाने के समय जब तक अपने हाथों से 1 -1 कौर हमें खिला न दे। उन्हें शांति नहीं मिलती।”

“अरे वाह! रुचि आज के समय में ऐसी सास होती है, विश्वास नहीं होता। धन्य है तेरी सास।” ” वह तो ठीक है मामी! पर एक बात कहूं तुमसे। तुमने तो शादी में देखा था ना मेरी सास कितनी काली है। जब वह अपने हाथों से हमें खाना खिलाती है तो उनके काले हाथों को देख कई बार मुझे उबकाई आ जाती है। पर क्या करूं कुछ कह नहीं सकती ना। यह तो अपनी मां के परम भक्त हैं। कुछ सुनेंगे नहीं।”

रुचि की ऐसी बातें सुन उसकी मामी हैरान रह गई और उसे समझाते हुए बोली “रुचि कैसी बात कर रही हो तुम! पढ़ी लिखी हो कर। तुम्हारे ऐसे विचार। तुम उनके रंग को देख रही हो। उनके उस मन को नहीं जिसमें तुम लोगों के लिए इतनी ममता भरी है। वरना कौन सी सास है जो आज के समय इस तरह अपनी बहू को सिर आंखों पर बिठाए।

ज्यादा दूर क्यों जाती हो !तुम्हारी नानी तो बहुत सुंदर थी ना और हम तीनों बहू भी रंग रूप में तो किसी से कम नहीं थी। घर का काम भी सभी संभाले हुई थी। फिर क्यों तुम्हारी नानी हरदम हमें इतना सुनाती थी। बेटा इंसान अपने रंग रूप से नहीं कर्मों से पहचाना जाता है और तुम्हारी सास तो सच में देवी है। तुम्हें तो उनकी पूजा करनी चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं मेरी समझदार रूचि मेरी बातों को समझ रही होगी।”

मामी की बात सुन रुचि की आंखों में पानी आ गया। वह बोली “सच में मामी मैं तो अपने रूप रंग के घमंड में इतनी अंधी हो गई थी। अपनी सास की अच्छाइयों को अनदेखा कर गई। आपने मेरी आंखें खोल दी। मैं आपसे वादा करती हूं कि जितना प्यार मेरी सास हमसे करती हैं, उससे दुगना मैं उन्हें सम्मान दूंगी व उनकी सेवा करूंगी और कोई ऐसा काम नहीं करूंगी जिससे मेरे बड़ों को शर्मिंदगी उठानी पड़े।”

उसकी बात से सुन शोभा नहीं प्यार से उसे गले लगा लिया।

दोस्तों कैसी लगी आपको यह रचना। पढ़कर अपने अमूल्य विचार इस विषय में जरूर दें।

आपकी सखी ,सरोज ✍️✍️

Image Credit @ https://www.maharaniweddings.com/

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
1