रोशनी: Story By Saroj Prajapati

रोशनी: Story By Saroj Prajapati

उन दिनों स्कूलों में एडमिशन का दौर चल रहा शुरू था।सुबह-सुबह जब मैं स्कूल पहुंची तो देखा एक महिला एक छह- सात साल की लड़की का दाखिला कराने के लिए पहले से खड़ी थी। मैंने उसे बैठने का इशारा करते हुए पूछा " कितने साल की है, यह!""सात साल की !""पहले कही पढ़ती थी!""नहीं बहन जी!""क्यों ?? अब तक इसका दाखिला क्यों नहीं कराया!""मां बाप नहीं है इसके। दादा दादी के पास रहती थी गांव में। बस अब मैं क्या बताऊं!!!!इसलिए मैं इसे अपने साथ ले आई। सोचा कुछ पढ़ लेगी!""तुम कौन हो इसकी!""बहन की लड़की है यह मेरी। मौसी लगती हूं मैं इसकी।""क्या नाम है लड़की का!""विपदा!""ऐं!!!! यह कैसा नाम है !


पता है विपदा का मतलब क्या होता है!""हां बहन जी , अच्छे से पता है! अब क्या बताएं बहन जी। इसके पैदा होते ही इसके माता पिता दोनों गुजर गए। बस घरवालों और बाहरवालों ने कहना शुरू कर दिया कि यह लड़की तो विपदा बनकर आई है परिवार पर। और इसका नाम ही विपदा पड़ गया।""अरे, उसका दोष तुम लोगों ने इसके सिर मढ़ दिया। तुम्हें पता है नाम हमारी पहचान है। अभी तो यह छोटी है। इसे कुछ समझ नहीं लेकिन जैसे जैसे यह बड़ी होगी और उसे अपने नाम का मतलब पता चलेगा । हीन भावना इसके अंदर घर कर जाएगी। जितने मजे से तुमने इसके नाम का मतलब मुझे बता दिया। आगे की सोचो! इसकी शादी के समय जब यही कहानी उसके ससुराल वालों को पता चलेगी तो क्या वह रिश्ता करेंगे!""हां बहन जी ! कह तो आप सही रही हो। हम लोगों की नासमझी की वजह से ये अनर्थ हो गया। अब कुछ हो सकता है क्या!""अच्छा यह बताओ, इसका कहीं आधार कार्ड या जन्मपत्री बनवाई हुई है तुम लोगों ने!""नहीं बहन जी।


यह तो घर पर ही हुई थी और होते ही इतनी मुश्किल आन पड़ी। नाम भी कहीं नहीं लिखाया। इसके दादा-दादी तो इसका मुंह देख कर भी राजी नहीं । बहन की निशानी है यह सोच कर, मैं इसे अपने साथ ले आई। सोचा थोड़ा पढ़ लिख जाएगी तो इसका जीवन संवर जाएगा।""यह तो तुमने अच्छा काम किया। शिक्षा की रोशनी से ही इसका जीवन संवर सकता है।अच्छा अब तुम कोई अच्छा सा नाम बताओ। मैं वही लिख देती हूं और उसी से तुम इसका आधार कार्ड बनवा लेना। फिर वही इसका नाम हो जाएगा और हां, घर पर सब इसे इसी नाम से पुकारना। ""बहन जी, आप इसका नाम रोशनी ही लिख दीजिए। आज से यह रोशनी है । हम सभी इसे इसी नाम से पुकारेंगे। आपकी बातें हमें समझ आ गई। पूरी कोशिश करेंगे कि कोई भी इसे इसके पुराने नाम से ना पुकारे।""चलो, यह तो अच्छी बात है। इसका एडमिशन मैंने कर दिया। परसों से इसे स्कूल भेज देना।"आज रोशनी को पढ़ते हुए पूरे 4 साल हो गए हैं। स्कूल में हमारे व अपने दोस्तों के बीच वह रोशनी के नाम से ही जानी जाती है। हां, उसकी मौसी व उसके परिवारवाले भी अब उसे इसी नाम से पुकारते हैं।


सरोज ✍️#Break The Bias

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