रिश्ते

रिश्ते


रिश्ते

आज मैं रिश्ते निभाने पर कुछ बात कर रही हूँ । दोस्तों हर इन्सान का अपना नज़रिया होता है , अपनी राय,या कहिए कि हर इन्सान की अपनी सोच है ।
..... रिश्तों के बारे में मेरी सोच ये है कि हमें जैसे भी हो अपने रिश्तो को सँभाल कर , बडी़ समझदारी से , बडी़ जिम्मेदारी से और प्यार से निभाने चाहिए । आज के समय में अक्सर रिश्तों को टूटते हुए देखते है हम लोग। और वैसे भी आजकल रिश्तो की अहमियत बहुत कम हो गई है ।
कहते है जहाँ प्यार है ,वहाँ परिवार है ।
परिवार बनते है प्यार से , दूसरों की गल्तियों को क्षमा करने से, और कभी-कभी अनदेखा करने से , ना कि अहँकार से ।
दोस्तों अहँकार से रिश्ते टूटते है , तो अहंकार किस काम का ।
किसी ने सही कहा है........क्षमा कितनी खुशनसीब है जिसे पाकर लोग अपनों को याद करते है।
............. Frnds कभी-कभी अन्जाने में हम से बहुत सी गल्तियाँ हो जाती है, कभी हम किसी को हँसी ठिठोली में कुछ ऐसा कह जाते है ,जिससे वो बुरा मान जाते है । लेकिन क्या फिर हम सोचते है कि हमने जिसका दिल दुःखाया है, क्या वो इन्सान चैन से रह रहा होगा, क्या उसे चैन की नींद आएगी ।
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.सच कहते है कि............

..सो जाता है हर कोई अपने कल के लिए , लेकिन ये कोई नही सोचता कि जिस का दिल दुःखाया है, वो सोया होगा या नहीं ।

तो इसलिए दोस्तो अगर हमसे कही किसी का दिल दुःखा हो या किसी को कोई परेशानी हुई हो तो हमें माफी माँगने (sorry) में हिचकिचाना नही चाहिए ।
अगर हमारे एक sorry कहने से रिश्तों में पडी़ दरार भर जाती है टूटते रिश्ते फिर से जुड़ जाते है तो हमे sorry कहने में परहेज़ नही करना है ।

और अगर किसी ने हमारा दिल दुःखाया है , और उसे अपनी गल्ती का एहसास हो जाए तो हमें उसे भी एक मौका देना चाहिए । तभी तो रिश्ते कामयाब होंगे, वरना रिश्तो को टूटने में एक पल भी नही लगता ।
..........तो दोस्तों मेरा मानना ये है कि आज के इस व्यस्त वक्त में हमें इन बिखरते रिश्ते बडी़ समझदारी के साथ निभाने चाहिए।

प्रेम बजाज ©®
जगाधरी ( यमुनानगर)

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