'रिश्तों को भी चाहियें ऑक्सीजन'

'रिश्तों को भी चाहियें ऑक्सीजन'

बचपन में कभी किताबों में जो पढ़ा,

वो सबक जिंदगी भर के लिए गाँठ बांध लिया।

जीने के लिए सांसें लेना ज़रूरी है,

और सांसों के लिए ज़रूरी है ऑक्सीजन।

बड़ी देर बाद ज़िंदगी ने ये सबक सिखलाया,

सिर्फ सांसों को ही नहीं,

खूबसूरत ज़िंदगी जीने के लिए,

हमारें रिश्तों को भी चाहिए होती हैं ऑक्सीजन।

इंसानी ज़िंदगी को हमेशा खूबसूरत बनाते ये रिश्ते,

दुःख और तकलीफ़ में हमारी हिम्मत बन जाते,

खुशियों में साथ-साथ मुस्कुराते हमारे ये प्यारें रिश्तें।

रिश्तो की इस नाज़ुक डोर को,

मज़बूत बनाने के लिये,

कदम-कदम पें ज़रुरी हैं,

रिश्तों को भी मिलती रहें ऑक्सीजन

आपसी समझ, फिक्र और मोहब्बत की।

जिस तरह साँस लेते वक्त,

हम ऑक्सीजन अंदर लेकर,

बाहर निकाला करते हैं, 'कार्बन-डाइ-ऑक्साइड'। 

उसी तरह रिश्तो की सांसो के लिए भी ज़रूरी हैं,

अपने तुच्छ, अहम्, लालच,नासमझी और द्वेष की,

कार्बनडाइऑक्साइड को समय-समय पर बाहर निकाला जाएँ।

कई बार ज़रुरत से ज्यादा फिक्र और नजदीकियाँ भी,

आपसी रिश्तो में घुटन पैदा कर दिया करती हैं।

इसीलिए ये पकड़ इतनी ढीली भी ना हो,

कि रिश्तें हाथों से फिसलकर गिर जाए,

और इन्हें इतना कसकर भी नहीं पकड़ना चाहिए,

कि रिश्तो का दम घुटने लग जाए।

बस तो फिर, अब देर किस बात की,

मोहब्बत, त्याग, परवाह, समझदारी और

अपने हिस्सें की ज़िम्मेदारियों को निभा कर,

अपनें सभी खूबसूरत रिश्तो को,

हमेशा देते रहियें समुचित मात्रा में ऑक्सीजन।

और अपनें सभी खूबसूरत रिश्तो को,

रखियें ताज़ा-महकता और हसीं,

ज़िंदगी के साथ भी, ज़िंदगी के बाद भी।


सकीना साबुनवाला✍।


#Thursdaypoetrychallenge







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