रोटी

रोटी

रोटी....

रोटी कपड़ा और मकान.........!!!!!!

 यह तीनों चीज है जिसके पास है वह बड़ा है नसीबा वाला.....

 खाने को रोटी ....

पहनने को.. कपड़े..

 रहने को मकान.....

 इस महंगाई के जमाने में यह जिसने भी पा लिया वह जिंदगी जी गया

 लेकिन जिनके पास...

.रहने को घर नहीं.....

पहनने को कपड़े नहीं....

और खाने को रोटी नहीं......

 उनको पूछ कर देखो क्या गुजरती होगी जिनके पास

 खाने को रोटी नहीं..

पहनने को कपड़े नहीं

और उनके सर पर छत नहीं..

     रोटी.... कपड़ा... और मकान..

     जो होते है कई  कई दिनों के भूखे उन्हें पूछ कर देखो क्या होती है रोटी

 मकान उनको पूछ कर देखो जिनके सर पर नहीं होती कोई छत जो मजबूर होते हैं सोने को फुटपाथ पर

 कपड़ों की चाह उनको पूछ कर देखो उनके बदन पर चिथड़े चिपके रहते है

 जो पुतलो को पहना कर रखते हैं कपड़े किसी गरीब के बदन पर पहना दे तो लाखों दुआएं मिले

रोटी... कपड़ा और मकान की क़ीमत...

 लिखना सब आसान  है

जीना मुश्किल है 

 


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