जीवंत किरदारों की पहचान - रेणुका शहाणे और मंदिरा बेदी

जीवंत किरदारों की पहचान - रेणुका शहाणे और मंदिरा बेदी

बचपन के दिन कितने सुहाने थे। वह भी क्या दिन थे जब टीवी देखें दूरदर्शन पर तरह-तरह के महाभारत, रामायण, देख भाई देख और खेल खिलौने, काबुलीवाला और ऐसे ही कई रंगीन चित्रहार मन में समाए हुए हैं।

टेलीविजन ने हमको एक नई दुनिया प्रदान करी जिसमें हमें अलग अलग तरह से भारतीय संस्कृति के बारे में पता लगी और भी कई चीजें जो हमें नहीं पता थी इसमें टेलीविजन ने हमें एक नई दुनिया के बारे में बताया तरह-तरह कि देश विदेश की खोज खबरें। अलग-अलग तरह की कितने प्रकार के सीरियल्स। कितने प्रकार के टीवी शो देखने में आए। हास्य, दुखद, रहस्य, रोमांच से भरी अनेक कहानियां अनेक धारावाहिक ऐसे हुए जो दिल पर अमिट छाप छोड़ गए।

और ऐसे ही इन धारावाहिकों में उनके किरदार निभाने वाले अलग-अलग अभिनेता अभिनेत्री जो लगते थे कि किरदारों को यह लोग जीवित कर रहे हैं ऐसे ही इस रंगीन जगत की दो अभिनेत्रीयाँ जो मुझे बेहद पसंद हैं और जिन्होंने अपने अभिनय से किरदार को जीवंत बना दिया था। 

पहली अदाकारा हैं रेणुका शहाणे जिनका शायद पहला टीवी सीरीज था 'सुरभि'।सुरभि' टीवी शो की होस्ट रेणुका शहाणे ने अलग पहचान बनाई। यह भारतीय संस्कृति से रूबरू करवाने वाले इस शो में सिद्धार्थ काक उनके को होस्ट थे। 1990 से 2001 तक चले इस शो के साथ रेणुका शहाणे को हर घर में लोग पहचानने लगे थे।

रेणुका शहाणे का मुझे सबसे पसंदीदा सीरियल लगता है दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाला 'सर्कस' जिसमें उन्होंने एक सर्कस के मुखिया की बेटी का किरदार निभाया था जो ऊंचाई से डरती थी और बाद में वह उस डर को कैसे काबू करती है बताया गया था और डर पर काबू करने के बाद वह बहुत अच्छे से अपना सर्कस में करतब दिखाती है तो उसमें कहीं ना कहीं मुझे अपनी झलक दिखती थी कि जैसे वह डरती है ऊंचाई से मुझे भी डर लगता था उनके उस किरदार ने मुझे बहुत प्रभावित किया था जब पहली बार मैंने भी अपने ऊचांई से लगने वाले डर को काबू किया था तो इसलिए मुझे 'सर्कस' उनका सीरियल बहुत-बहुत बेहद बेहद पसंद है। 

उनका जीटीवी पर 'सैलाब' करके एक सीरियल आता था जिनमें उनके को होस्ट थे सचिन खेडकर जी। किस तरह वह एक लड़की का किरदार निभाती हैं जिसकी माँ बचपन में ही गुज़र जाती है और उसके बाद वह अपने पापा के साथ और बहन के साथ रहती है और चुनौतियों का सामना करती हुई आगे बढ़ती है तो मुझे उस जैसी खुद्दार लड़की का चरित्र बहुत पसंद आया जिसे रेणुका शहाणे ने बखूबी निभाया था। 

इसके अलावा मुझे उनकी 'हम आपके हैं कौन' फिल्म बहुत अच्छी लगती है। एक अलग ही तरह का नूर नज़र आता है उनके चेहरे पर वह जब भी खिलखिलाती हैं, हंसती हैं, मुस्कुराती हैं ऐसा लगता है सारा दर्द अपने आप खत्म हो गया।

इस तरह की अभिनेत्री हैं जो मुझे बेहद बेहद पसंद है और उनको मैं अपने निजी जिंदगी से इसलिए ज्यादा मानती हूं कि मेरा निजी जिंदगी का जो चरित्र है वह उनके जैसा ही लगता है मतलब कि जैसे वह हंसती हैं तो मुझे भी बहुत हंसना पसंद है जिस तरह की वह इस फिल्म में दिखाई गई हैं उस तरह से रहना मुझे अच्छा लगता है।

यह तो हुई रेणुका शहाणे जी उसके बाद एक अदाकारा हैं मंदिरा बेदी जिन्होंने 'शांति' नाम का एक सीरियल किया था दूरदर्शन पर जो मुझे बेहद पसंद आया था।'शांति', इस सीरियल का नाम लेते ही मंदिरा बेदी याद आ जाती हैं। उन्होंने इस सीरियल के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। इस सीरियल की कहानी कामेश महादेवन और राजेश सिंह की है जो एक आलिशान शांति मेंशन में रहते हैं। 'शांति मेंशन' में कई गहरे राज छिपे होते हैं। शांति के रूप में मंदिरा बेदी इस सीरियल में लोगों को अपना दीवाना बना चुकी हैं जिसमें उन्होंने एक जर्नलिस्ट की भूमिका अदा की थी।

उन्होंने किस तरह से चुनौतियों का सामना किया था जिसमें वह एक माफिया गैंग के सरगना का सामना करती हैं उसके चुगंल से बाहर निकल कर किस तरह से आती हैं वह दृश्य बेहद साहसपूर्ण देखने वाला था जो मेरे जहन में आज तक भी तरोताजा है कि वह किस तरह से बाहर निकली थी और उन्होंने क्या डायलॉग बोला था।

 मुझे अभी तक भी याद है तो यह मुझे छोटी-छोटी चीजें हैं जो हमें आगे चलकर चुनौतियों में काम आती है कभी भी काम आ सकती हैं तो यह सीरियल वूमेन एंपावरमेंट था जिसमें शांति की माँ का रेप हो जाता है और उसके बाद वह अपनी बेटी को बड़े करती है जिसका नाम शांति रखती है। बाद में शांती अपने पिता को ढूंढती है और ढूंढते-ढूंढते उनके पास पहुंचती है जहां पर उस डॉन के संबंध होते हैं शांती के पिता से जो उनके घर का नौकर होता है वह असली में डॉन होता है तो किस तरह से शांति उसका पर्दाफाश करती है और अपने पिता तक पहुंचती है उनको यह रिलाइज करवाती है कि मेरी मां के साथ जो हुआ है वह तुमने गलत किया और उनको जेल पहुंचाती है। 

इस पूरी कहानी ने मुझे इतना प्रभावित किया है कि उसके बाद ऐसा लगता है कि औरत चाहे तो क्या नहीं कर सकती। औरतों में इतनी शक्ति होती है कि अगर वह कुछ ठान लें तो उनसे ज्यादा शक्तिशाली मेरा ख्याल ही कोई होगा शायद कोई भी नहीं।

#वर्ल्डटेलिविजनडे
#ThePinkComrade
पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपकी अभिव्यक्ति का इंतजार रहेगा। 
वाणी राजपूत

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