सभी पिता हीरो होते हैं

सभी पिता हीरो होते हैं

पिता का होना क्या होता हैं।ये वो ही जानते हैं जिनके पिता नहीं हैं। जिनके पास हैं वो उनकी कद्र नहीं करते।पिता के बारे में ज्यादा कभी पढा़ नहीं और सुना नहीं ,मगर मैंने महसूस किया हैं।

बात तब कि हैं जब मैं कक्षा 3 मैं थी। हम जोधपुर रहा करते थे।मेरे पापा एक प्राइवेट कंपंनी में मैनेजर थे।अक्सर काम से बाहर रहा करते थे।एक रात पापा रात तीन बजे इंदौर से लौटे। सभी के लिए तोहफे लाये। सुबह नवरात्री का आखिरी दिन था। घर में कन्याभोज था। कन्याभोज के बाद पापा चाचा सब लोग खाने पर बैठे।

पापा ने जैसे ही पहला निवाला लिया।खाना मुंह से गिर गया।पापा को पैरालेसिस का अटैक आया था।मुंह टेड़ा हो गया था। सभी ने काम छोड़ पापा को संभाला। मेरे चाचा डाॅक्टर थे।तुंरत इलाज शुरू किया।नजदीक ही बुटाटी नामक स्थान था। जहा़ँ लकवे का इलाज होता था।पापा को हम व आँ भी ले गये।

समय के साथ पापा ठीक तो हो गये मगर नौकरी चली गयी।चाचा जितने अच्छे थे चाची उनके विपरित थी।मौका देख चाचा के कान भरें और हमें घर से निकाल दिया।ये कहकर कि देखते हैं 5 बच्चों को कैसे पालते हैं। हम जोधपुर से जयपुर आ गये।पापा ने  दूसरी नौकरी ढूढी। समय के साथ सब ठीक होता गया। जितना होता उतने में हमने घर चलाया। तीनों बहनों ने घर से पढा़ई की।ग्रेजुऐशन कर प्राइवेट नौकरी की।भाईयों को पढा़या।पापा ने रात -दिन मेहनत कर हमें काबिल बनाया। ना खुद थके और ना ही हमें रूकना सिखाया।

इस तरह से हर हालात में पापा ने पिता होने कि जिम्मेदारी निभायी।आज हम बहनें भी अपने क्षैत्र में नाम कमा  चुकी हैं। गर्व  हैं मुझे मेरे पापा पर। 

#MerePapaMereHero

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