सबक

सबक

श्वेता मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुई, जिंदगी में जो चाहा वह उसे पलक झपकते ही मिल जाता। पैसे -दौलत ,ऐशों -आराम ,इज्जत सब कुछ उसके पास था।


पैसे के बल पर अच्छी पढ़ाई तो श्वेता ने हासिल कर ली लेकिन संस्कारों की कमी उस में बचपन से रही।मां पिता का प्यार हमेशा उसे पैसों के कलेवर में लिपटा हुआ ही मिला। घर के बड़ों के पास बच्चों के लिए पर्याप्त समय कभी रहा नहीं। जिसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पड़ा।


श्वेता पैसे की गुरुर में चूर रही। कोई भी घर में काम करने वाला कर्मचारी छोटी सी भी गलती कर देता तो श्वेता उसके ऊपर चिल्ला उठी। आप किसी भी भाषा में चिल्लाएं या गाली -गलौज दें, वह अभद्र ही लगता है। श्वेता अक्सर अपने कर्मचारियों को अंग्रेजी में ही गाली गलौज करती थी।


जो पुराने करमचारी थे वह तो अपमान का घूंट पी लेते थे लेकिन नए कर्मचारी पीठ पीछे श्वेता के लिए बातें बनाते ।

श्वेता के बंगले में काम करने वाली एक लड़की जो बहुत ही निम्न परिवार से आती थी ,श्वेता ने उसकी छोटी सी गलती पर उसे अंग्रेजी में बहुत खरी-खोटी सुनाई।


वह लड़की बहुत स्वाभिमानी थी, उसने भी पलट के श्वेता को उसी की भाषा में जवाब दिया।श्वेता पहले तो अंग्रेजी में उसे बोलते हुए देखकर दंग रह गई दूसरा किसी ने उसको पहली बार जवाब दिया था, इस प्रकरण ने श्वेता के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा दी।


श्वेता ने उसकी शिकायत अपने माता-पिता से की। माता-पिता एक तरफ की बात सुनकर उस लड़की को बुलाकर डांटने लगे।उस लड़की ने विनम्रता के साथ श्वेता के माता-पिता को सारी बात बताई और यह भी बताया कि गलती उसकी नहीं बल्कि श्वेता की थी।तथा उसने श्वेता के अभद्र व्यवहार के बारे में विस्तृत से श्वेता के माता-पिता को बताया।


अपनी बेटी के अभद्र व्यवहार के लिए दोनों माता पिता ने उस लड़की से क्षमा मांगी।और उसके बारे में पूछने लगे।

उस लड़की ने बताया कि वह मिशनरी कॉन्वेंट स्कूल 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर, आगे की पढ़ाई कर रही है। पिता एक छोटी सी कंपनी में चपरासी है वह उसकी आगे की पढ़ाई का खर्चा नहीं उठा सकते। इसलिए वह नौकरी कर रही है और अपनी कमाई हुई रकम से अपनी आगे की पढ़ाई कर रही है। यह उसकी पहली नौकरी है और वह अपनी पहली कमाई से अपने कॉलेज की फर्स्ट सेमेस्टर की फीस जमा कर चुकी है।


श्वेता के माता पिता उस लड़की की ईमानदारी और मेहनत से इतने प्रभावित हुए हैं कि उन्होंने उसे अपनी कंपनी में एक अच्छी नौकरी देने का प्रस्ताव दिया।पर उस स्वाभिमानी लड़की ने यह कहकर प्रस्ताव को् ठुकरा दिया कि उसकी पढ़ाई अभी इस लायक नहीं हुई है कि वह उस जिम्मेदारी को उठा सके।


उस लड़की की बात से, श्वेता के माता-पिता इतना प्रभावित किया कि वह उस लड़की के कायल हो गए।और उसे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद कभी भी नौकरी की आवश्यकता हो तो वह उन से संपर्क कर सकती है। इस प्रकरण के बाद श्वेता के पिता ने श्वेता को अपने पास बुलाया और कहा"श्वेता तुम्हें पता है तुम्हारे इतने खर्च कौन उठाता है"श्वेता ने अपने मोबाइल को देखते हुए कहा "और कौन पापा आप उठाते हैं"यह सुनकर श्वेता के पिताजी ने उससे कहा 'आज से यह सब बंद"


तुम अब अपने लिए नौकरी ढूंढो और अपने खर्चे उठाओ।"श्वेता ने अचानक फोन बंद किया और अपने पापा की ओर देखते हुए कहा "यह क्या कह रहे हैं आप हमें किस चीज की कमी थोड़ी है घर में बहुत पैसा है और मैं आपकी इकलौती लड़की। मुझे नौकरी की क्या जरूरत "।

श्वेता की बात सुन श्वेता के पिता ने उससे कहा"तुम पढ़ी लिखी हो अच्छी नौकरी तुम्हें मिल जाएगी, तुम्हारे खान-पान के साथ सारे खर्चे अब तुम खुद उठाओगी।, अगर तुम्हें बाहर नौकरी करने में कोई शर्मिंदगी महसूस हो रही है तो कल से तुम मेरा ऑफिस ज्वाइन कर सकती हो, बेटी होने के नाते मैं तुम्हारा इतना फेवर कर सकता हूं"।

श्वेता को समझ में नहीं आ रहा था कि आज उसके माता-पिता को क्या हो गया है कल तक जो उसकी एक छोटी सी इच्छा के लिए लाखों रुपए खर्च कर देते थे आज वह उससे इस तरह से बात क्यों कर रहे हैं।

परिस्थिति को भांपते हुए श्वेता ने कहा "मैं कल से आपको ज्वाइन कर लूंगी।"उसे लगा पापा के ऑफिस में उसे अच्छी नौकरी आराम से मिल जाएगी।

दूसरे दिन श्वेता जैसे ही ऑफिस के लिए निकली तो उसे पता चला कि उसके पिता ने पहले से ही ड्राइवर को आदेश दे रखा था कि आज से श्वेता के लिए कोई भी कार उपलब्ध नहीं होगी,वह खुद ऑटो करके ऑफिस आएगी।

श्वेता टैक्सी करके जैसे-तैसेऑफिस पहुंची, और सीधे अपने पापा के केबिन में चली गई।

यह देखकर श्वेता के पिताजी को गुस्सा आया और उन्होंने कहा"यहां तुम एक साधारण सी कंप्यूटर ऑपरेटर की जॉब में हो, और तुम मेरे केबिन में बिना मेरी परमिशन के नहीं आ सकती हो, तुम्हें महीने के ₹10000 मिलेंगे और इसी से तुम्हें अपना पूरा खर्चा उठाना है।"

श्वेता इससे पहले कुछ कह पाती पिता ने बाहर जाने का इशारा कर दिया।

श्वेता चुपचाप से बताए गए डेक्स पर बैठ गई, एक महिला ने आकर श्वेता को सारे कामों की जानकारी दी, और यह बताया कि आज से वह उनके अंडर में काम करेगी।

श्वेता की आवाज़ में अभी भी वही गुरूर था, अतः उस महिला कर्मचारी ने श्वेता को हिदायत देते हुए कहा कि वह यहां पर एक मामूली सी कंप्यूटर ऑपरेटर है उसे अपने व्यवहार में परिवर्तन करना होगा।

तब जाकर श्वेता के गुरुर में कुछ कमी आई और कुछ घंटे बाद श्वेता सामान्य हो गए।

इस तरह से अब रोज श्वेता को अपने खर्चे पर ऑफिस जाना पड़ता, अपने सारे खर्चे खुद वहन करने पड़ते तथा उसके सारे ऐशों आराम बंद कर दिए गए।

अब एक आम लड़की की तरह श्वेता को जिंदगी की असलियत से रूबरू होने को हर दिन मिलता, वहीं दूसरी ओर श्वेता को पैसे की कीमत भी पता चलने लगीं, दिन पर दिन श्वेता के व्यवहार में विनम्रता, दूसरों का आदर करना आने लगा, सबसे बड़ी बात उसे अपनी गलती मानने की आदत भी पड़ने लगी।

एक बिगड़ैल रहीस, अब व्यवहारिक होती जा रही थी, धीरे धीरे वह कर्मचारियों के साथ घुलने- मिलने लगीं।

इस तरह से एक महीने बाद उसे पहली तनख्वाह प्राप्त हुई, जिसकी खुशी उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई पड़ रही थी, अब तक वह अपने पिता के पैसे पर ऐश करती थी लेकिन अपनी कमाई पर उसे आज गर्व हो रहा था, वह सीधे घर गई और अपनी कमाई रकम अपनी मां के हाथ में पकड़ाते हुए कहा"मां यह मेरी पहली मेहनत की कमाई है इसे आप और पापा अपने पास रखें, मुझे आज पैसे की कीमत समझ में आ गई है, जो हमारे घर में काम कर रहे हैं वह लोग हमसे बहुत ऊंचे और महान हैं जो अपनी मेहनत कर अपने घर का खर्चा उठा रहे हैं, आज मुझे अपने आप में शर्मिंदगी महसूस होती है, कि मैं इन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती थी, जबकि वह मेहनत कर पैसा कमाते थे और मैं किसी दूसरे की मेहनत के पैसे जी रही थी।"

अपनी पहली कमाई वहीं मां के पास रख श्वेता उन सभी कर्मचारियों से माफी मांगने चली गई जिसके साथ वह बुरा सलूक करती थी।

सब कर्मचारियों ने श्वेता के व्यक्तित्व में आए परिवर्तन को खुले दिल से अपनाया और उसे माफ कर दिया।

यह सब देखकर श्वेता के माता-पिता बहुत खुश थे, उन्हें यह संतोष हो गया कि उनकी बेटी आज एक नेक दिल व्यक्ति में बदल गई है और उसे दूसरों का आदर सम्मान करना तथा पैसे की महत्वता के बारे में पता चल गया है,जिसके कारण वह अपनी जिंदगी में आने वाली समस्याओं का स्वयं समाधान कर सकती है और जिंदगी का यह पाठ उसे बुलंदियों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस प्रकार श्वेता ने अपनी पहली कमाई से जिंदगी मे मेहनत की महत्वता को समझा, और मेहनत करने वालों का आदर करना सिखा।









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