सबसे मीठी गुझिया

सबसे मीठी गुझिया

यूँ तो हर त्यौहार हमारे जीवन में खुशियां ही बिखेरता है, लेकिन अगर किसी त्यौहार के साथ कुछ स्पेशल यादें हो तो त्यौहार का मजा़ दुगुना हो जाता है।

जैसा कि अधिकांशत: घरो में होता है, शादी के कुछ दिन बाद ही सब बच्चे के लिये बोलने लगते है, मीनू के साथ भी ऐसा ही हुआ। मीनू को भी बच्चे बहुत पसंद थे, लेकिन दीपक को बच्चो से कुछ खास लगाव नही था। उसे अपनी आजादी से बहुत प्यार था। और भगवान ने भी मानो दीपक का साथ दिया हो, शादी के दस सालो तक दोनो को कोई बच्चा नही हुआ।

मीनू दुखी रहती थी तो उसने अपनी आगे की पढा़ई जारी रखी और पी एच डी शुरु की। इसी बीच बच्चा होने के लिये डाक्टर से भी सलाह लेते रहते थे। दीपक को कुछ खास रुचि नही थी, लेकिन मीनू की खुशी के लिये उसके साथ डाक्टर के पास चला जाता। मीनू की पी एच डी भी पूरी हो गयी, लेकिन वह बच्चे की किलकारी को तरसती रह गयी। फिर किसी ने IVF करवाने की सलाह दी। बडी़ उम्मीदो और कष्ट सहकर मीनू ने यह करवाया और अब इंतजार था तो बस इसके परिणाम का।

कुछ दिनो बाद ही मीनू को पीरियड्स आ गये, मतलब फिर से उसका माँ बनने का सपना टूट गया था। लेकिन उसने भी मानो भगवान को चुनौती देने की ठान ली थी। फिर से कुछ महीनो बाद उसने IVF करवाया और इस बार वह गर्भवती हुई। सालो से जिस पल का इंतजार था, आखिर उसके लिये वह पल आया। डाक्टर ने डिलीवरी डेट फागुन के महीने में दी थी।

इस साल इस महीने का सभी को बहुत ही बेसब्री से इंतजार था। आखिरकार फागुन का महीना आया और एक-2 दिन कटने लगा बच्चे के इंतजार था। आखिर वह घडी़ भी आ गयी। मीनू को प्रसव पीडा़ होने लगी। जब मीनू अस्पताल जाने लगी, तो बोली-माँ, जाने से पहले एक गुझिया खा लूँ क्या? सब हँसने लगे और मीनू को गुझिया दी। डिलीवरी में कुछ दिक्कते आयी और कुछ घंटो की जद्दोजहद के बाद मीनू ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया। खुशी की लहर दौड़ गयी चारो ओर। सबको इंतजार था तो दीपक की प्रतिक्रिया का। दीपक ने जैसे ही बिटिया को गोद में उठाया, टुकुर-2 देखने लगी बेटी।

अरे तू तो मेरी सबसे मीठी वाली गुझिया है। सभी हँसने लगे यह सुनकर। दीपक आज भी बेटी को गुझिया कहकर ही पुकारता है।

दोस्तो जैसे फागुन इनके जीवन में कुछ खास खुशियां लेकर आया, दुआ करती हूँ कि हम सबके जीवन में भी लायें।

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