सागर से सीखा है मैने

सागर से सीखा है मैने

मैं हर रोज इस समुंदर के किनारे आकर कुछ देर बैठ जाती हूं। 
समुद्र से सीखा है मैने इतना गहरा होने पर भी शांत सा खुद मैं रहना,

कभी खूब शोर करना और कभी मौन होकर बैठ जाना,
जब इसकी लहरे उठती हैं वो भी बहुत कुछ मुझे सिखाती हैं, 

कभी डूबना कभी तैरना कभी मचलना कभी उझलना 
कभी खुद में सिमटना तो कभी किनारे से आकर लगना।

समंदर ही तो मुझे सिखाता हैं हर परिस्थिति से लड़ना,अपने लक्ष्य पर अड़े रहना।
 हलचल लहरों की कितनी भी हो बस आता हो खुद को संभालना। 

पंछी भी देते है सीख मगन होकर बस गाते रहना। 
समंदर से सीखा है मेने डूबकर कर उभरना हर बार कुछ नया अनुभव करना। 

जब होता हैं मन उदास जाती हूं समुंदर के किनारे,कुछ नही सीख लेने के लिए एकदम शांत बस बहते रहने के लिए...

ममता गुप्ता✍ 

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