सामाजिक मुद्दों में एक अहम मुद्दा बाल मजदूरी

सामाजिक मुद्दों में एक अहम मुद्दा बाल मजदूरी

"सामाजिक मुद्दों में एक अहम मुद्दा बाल मजदूरी"


हमारे देश की जन संख्या में से शायद करोड़ों की संख्या में बच्चें किसी न किसी क्षेत्र में बाल मजदूरी कर रहे है, जो कि बहुत ही निंदनीय है। खाने खेलने की उम्र में मजदूरी करवाना अत्याचार से अधिक कुछ नहीं। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत में बाल मजदूरों की संख्‍या 1.01 करोड़ है जिसमें 56 लाख लड़के और 45 लाख लड़कियां हैं। दुनिया भर में कुल मिलाकर 15.20 करोड़ बच्‍चे 6.4 करोड़ लड़कियां और 8.8 करोड़ लड़के बाल मजदूर होने का अनुमान लगाया गया है अर्थात दुनिया भर में प्रत्‍येक 10 बच्‍चों में से एक बच्‍चा बाल मजदूर है। लोग क्यूँ नहीं समझते कि बच्चों को पढ़ा लिखाकर कुछ बनाएंगे तो आगे जाकर पूरे परिवार के हालात सुधर सकते है।


वैसे पिछले कुछ सालों से बाल श्रमिकों की दर में कमी आई है। इसके बावजूद बच्‍चों को कुछ कठिन कार्यों में अभी भी लगाया जा रहा है, जैसे बंधुआ मजदूरी, बाल सैनिक और देह व्‍यापार। भारत में विभिन्‍न उद्योगों में बाल मजदूरों को काम करते हुए देखा जाता है, जैसे ईंट भट्टों पर काम करना, गलीचा बुनना, कपड़े तैयार करना, घरेलू कामकाज, खानपान सेवाएं जैसे चाय की दुकान पर खेतीबाड़ी, मछली पालन और खानों में काम करना आदि। इसके अलावा बच्‍चों का और भी कई तरह के शोषण का शिकार होने का खतरा बना रहता है जिसमें यौन उत्‍पीड़न तथा ऑनलाइन एवं अन्य चाइल्‍ड पोर्नोग्राफी शामिल है।


बाल मजदूरी और शोषण के अनेक कारण हैं जिनमें गरीबी, सामाजिक मापदंड, वयस्‍कों तथा किशोरों के लिए अच्‍छे कार्य करने के अवसरों की कमी, प्रवास और इमरजेंसी शामिल हैं। ये सब वज़हें सिर्फ कारण नहीं बल्कि भेदभाव से पैदा होने वाली सामाजिक असमानताओं के परिणाम हैं।


बच्‍चों का काम स्‍कूल जाना है न कि मजदूरी करना। बाल मजदूरी बच्‍चों से स्‍कूल जाने का अधिकार छीन लेती है। बाल मजदूरी शिक्षा में बहुत बड़ी रुकावट है, जिससे बच्‍चों के स्‍कूल जाने में उनकी उपस्थिति और प्रदर्शन पर खराब प्रभाव पड़ता है। जिसका दुष्परिणाम होता हैं जैसे शिक्षा से वंचित हो जाना और उनका शारीरिक व मानसिक विकास ना होने देना।


बाल तस्‍करी भी बाल मजदूरी से ही जुड़ी है जिसमें हमेशा ही बच्‍चों का शोषण होता है। ऐसे बच्‍चों को शारीरिक, मानसिक, यौन तथा भावनात्‍मक सभी प्रकार के उत्‍पीड़न सहने पड़ते हैं जैसे लड़कियों को वेश्‍यावृति की ओर जबरदस्‍ती धकेला जाता है, शादी के लिए मजबूर किया जाता है या गैर-कानूनी तरीके से गोद लिया जाता है, इनसे कम और बिना पैसे के मजदूरी कराना, घरों में नौकर या भिखारी बनाने पर मजबूर किया जाता है और यहां तक कि इनके हाथों में हथियार भी थमा दिए जाते हैं।


बाल श्रम औद्योगिक क्रांति के आरम्भ के साथ ही प्रारम्भ हो गया था। १४ साल से कम उम्र के बच्चों को काम देना गैर-क़ानूनी है हालाँकि इस नियम के कुछ अपवाद हैं जैसे की पारिवारिक व्यवसायों में बच्चे स्कूल से वापस आकर या गर्मी की छुट्टियों में काम कर सकते हैं l इसी तरह फिल्मों में बाल कलाकारों को काम करने की अनुमति है, खेल से जुड़ी गतिविधियों में भी वह भाग ले सकते हैं।फिर भी उम्र के पहले बच्चों को काम करवाना जायज़ नहीं है।


(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

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