सौम्य चेहरे का वीभत्स रूप

सौम्य चेहरे का वीभत्स रूप

हर इंसान के दो रूप होते है।एक रूप को जानकर हम उसी से उस इंसान के बारे मे धारणा बना लेते है।नाथूराम गोडसे के बारे मे हमने ऐसा ही कुछ सोच कर रखा है।आइए आज उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके दूसरे रूप को भी जानने की कोशिश करते है। इसमे उनका परिचय और जन्मस्थान भी जानना जरूरी है।


नाथूराम विनायकराव गोडसे का जन्म एक मराठी चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता, विनायक वामनराव गोडसे, एक डाक कर्मचारी थे।उनकी माँ लक्ष्मी (नव गोदावरी) थीं। जन्म के समय, उनका नाम रामचंद्र था। एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण नाथूराम को उनका नाम दिया गया था। एक अंधविश्वास के कारण युवा रामचंद्र को अपने जीवन के पहले कुछ वर्षों के लिए एक लड़की के रूप में पाला गया था, उनकी नाक छिदी हुई थी और नाक-अंगूठी जिसे मराठी में नथ कहते है। उन्हे पहनाई गई थी।इसी कारण से उन्हे "नाथूराम" (शाब्दिक रूप से "नाक-अंगूठी वाला राम") उपनाम मिला था। छोटे भाई के पैदा होने के बाद, उनके माता पिता ने उन्हे एक लड़के के रूप में देखना शुरू किया।हम नाथूराम गोडसे को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे के तौर पर जानते हैं और इसके अलावा और कोई जानकारी जल्दी नहीं मिलती।


गोडसे के भाई गोपाल दास गोडसे ने एक किताब लिखी जिसका नाम है \"मैनें गांधी को क्यों मारा?\" उन्होने एक बात लिखी है, \"देवदास (गांधी के पुत्र) शायद इस उम्मीद में आए होंगे कि उन्हें कोई वीभत्स चेहरे वाला, गांधी के खून का प्यासा कातिल नजर आएगा, लेकिन नाथूराम सहज और सौम्य थे। उनका आत्म विश्वास बना हुआ था। देवदास ने जैसा सोचा होगा, उससे एकदम उलट।\" नाथूराम सहज और सौम्य स्वभाव के थे।


नाथूराम \"राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ\" का सदस्य रहे थे और गांधी की हत्या करने के चलते उन्हे 15 नवम्बर 1949 को फांसी दी गई। भले ही नाथूराम ने गांधी का हत्या की थी लेकिन इससे पहले वो उनके विचारों से प्रभावित थे। नाथू का खुद कहना था कि आजादी की लड़ाई में सावरकर के बाद गांधी जी के ही विचारों ने मुल्क को आजाद कराया है। लेकिन इसके बाद भी नाथू गांधी की हत्या का कारण क्यों बना इस पर अलग कहानी है।


नाथूराम ने अपनी आखिरी भाषण में कहा था कि \"मेरा पहला दायित्व हिंदुत्व और हिंदुओं के लिए है, एक देशभक्त और विश्व नागरिक होने के नाते। 30 करोड़ हिंदुओं की स्वतंत्रता और हितों की रक्षा अपने आप पूरे भारत की रक्षा होगी, जहां दुनिया का प्रत्येक पांचवां शख्स रहता है। इस सोच ने मुझे हिंदू संगठन की विचारधारा और कार्यक्रम के नजदीक किया। मेरे विचार से यही विचारधारा हिंदुस्तान को आजादी दिला सकती है और उसे कायम रख सकती है।\"नाथू का कहना था कि वो गांधी से प्रेरित थे लेकिन उन्होंने देश के बंटवारे में अहम भूमिका निभाई और मुस्लमानों का साथ दिया और इसके एवज में उन्होंने ना जाने कितने ही हिंदू भेंट चढ़ गए। वास्तव में नाथू गांधी की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा से नफरत करते थे जोकि शायद संघ की विचारधारा को सुहाती नही थी इसलिए उसने प्रेरित होकर गांधी की हत्या की।


बापू की हत्या के बाद नाथूराम गोडसे जेल में मिलने महात्मा गांधी के पुत्र देवदास गांधी गए थे। उनसे गोडसे ने कहा था कि तुम्हारे पिताजी की मृत्यु का मुझे बहुत दुख है। नाथूराम ने देवदास गांधी से कहा, मैं नाथूराम विनायक गोडसे हूँ। आज तुमने अपने पिता को खोया है। मेरी वजह से तुम्हें दुख पहुँचा है। तुम पर और तुम्हारे परिवार को जो दुख पहुँचा है, इसका मुझे भी बड़ा दुख है। कृपया मेरा यकीन करो, मैंने यह काम किसी व्यक्तिगत रंजिश के चलते नहीं किया है, ना तो मुझे तुमसे कोई द्वेष है और ना ही कोई खराब भाव।


हम देखते है कि नाथूराम ने अपनी सोच और विचारधारा के कारण बापू पर गोली चलाई और उसका कारण भी बताया।वे सौम्य थे पर एक सोच ने उनकी जिंदगी बदल दी ।




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