समझदार कौन?

समझदार कौन?

आज कल के समय में इतना कुछ घटित हो रहा है जिसके हम मात्र मूक दर्शक बन के रह जाते हैं। घरेलू हिंसा जिसे कई बार हम देख कर भी अनदेखा कर देते हैं ।

कुछ ऐसा ही हो रहा था रमा के आसपास । आपने परिवार के साथ कुछ सालों पहले मुंबई आई थी। जिस सोसाइटी में रमा रहती थी वहां उसके दोस्त कम थे और उन दोस्तों में से एक थी निर्मला। निर्मला पढ़ी लिखी वर्किंग वूमेन थी, जो अपने पति और बच्चों के साथ उसी ब्लॉक में रहती थी। आए दिन निर्मला और उसके पति के झगड़े होते रहते थे ,फिर भी निर्मला सब सह रही थी। सह रही थी कई बार रमा ने समझाया लेकिन निर्मला परिवार का वास्ता देती और उसे मना लेती।

रमा-“निर्मला तुम पढ़ी लिखी हो ,जॉब करती हो फिर क्यों इतना सहती हो?”

निर्मला-“(दर्द छुपाते हुए) अरे यार कुछ नहीं मैं ही ज्यादा बोल ,गई थी अब थोड़ी बहुत लड़ाई तो हर घर में होती है।”

रमा कई बार कहती पर निर्मला पर कोई असर न पड़ता।

उधर रमा की कामवाली कमला,जो रोज पास की झुग्गी से ही आती थी कुछ कुछ वैसा ही हाल था।

कमला-“राम-राम दीदी ,कैसी हो?”

रमा-“राम-राम कमला आज फिर लेट?
कमला-“अब क्या छुपाना तुमसे दीदी ,अपुन का मर्द रोज रोज किच किच करता है, आज सुबह ही दारू पीकर बैठा था तो लड़की को बहन के घर छोड़ने को गई, अब खुद को तो देख नहीं सकता, लड़की को क्या देखेगा एइच वास्ते लेट हुआ दीदी”
रमा-“क्यूं तेरा आदमी काम नहीं करता क्या?”
कमला-“करता है ना ,गार्ड की नौकरी ,आज नाइट ड्यूटी है।”
रमा से बात करके कमला काम में लग गई। कमला के तीन बच्चे थे दो बेटे और एक छोटी बेटी। स्कूल जाते थे बच्चे,बस छोटी घर पर रहती।

कुछ दिन निर्मला भी नहीं दिखी सोसाइटी में ,फिर एक दिन अचानक बालकनी से रमा ने निर्मला को देखा। देखकर लगा ,जैसे हॉस्पिटल से आई हो और उदास भी लग रही थी।
दूसरे दिन जब रमा निर्मला के घर गई निर्मला ने बहुत कोशिश की ,मगर दुख छुपा न सकी।
रामा के प्यार और अपनेपन से खुद को रोक ना पाई तब पता चला रमेश (निर्मला के पति) कई दिनों से निर्मला से लड़ रहे थे , हद तो तब हो गई जब गुस्से में इतना मारा निर्मला को ,उसका गर्भपात हो गया। खून के रिसाव के कारण उसे एडमिट कराना पड़ा ।
रमा ने रमेश से अलग होने की सलाह दी मगर निर्मला ने नहीं माना।
निर्मला-“क्या बात कर रही है रमा ऐसा कहीं होता है? मेरे बेटे के सर से बाप का साया हट जाएगा ।ठीक है , किसी दिन कुछ हो गया ,मगर रमेश शर्मिंदा थे अपने किए पर रमेश ने वादा किया है सब ठीक हो जाएगा।

बुझे मन से रामा घर चली आई तो देखा कमला भी दुखी बैठी है।” क्या हुआ कमला?”, रमा बोली ।

कुछ नहीं दीदी वही पुरानी कहानी आज हाथ उठाया मेरे पे ,मेरा आदमी। पीट कर आई साले को। हाथ उठाएगा ,कुछ होगा मेरे को तो खिलाएगा क्या बैठकर?”कमला बोली और हंस दी।

मैं भी उसके जोश को देखकर मुस्कुरा दी।
फिर एक दिन अचानक कमला का फोन आया-“मैं जल्दी में है दीदी, एक हफ्ते को छुट्टी पर जाती है ,आकर सब बताएगी।”
मुझे भी कुछ अजीब सा लगा पर काम में व्यस्त हो गई।
इधर 1 हफ्ते से निर्मला से भी नहीं मिल पाई उसके बाद एक दिन कमला आई।

चाय लेकर बैठी तो रमा ने पूछा -“क्या हुआ कमला , छुट्टी क्यूं ली?”
कमला-“दीदी उस दिन तो मेरा माथा सटक गया था। एक तो दूसरी औरत लेकर आया ,और मेरे बेटे को दारु लाने को बोला मैं बोली -काय को लाया ?तो बोलता है कि तेरे में रस नक्को, अभी यह यहींच रहेगी। पर जब बेटा दारू लेकर आया तो बेटे को भी दारू जबरदस्ती पिलाया, अब तो मेरी सटक गई। तुरंत पुलिस थाने में गई, रपट लिखाई और तलाक की अर्जी दी थी ।वही सब काम को रोज जाने को था और एक खोली भी लेने को थी ।मैं अपने बच्चों को नरक में नहीं डालना चाहती। थोड़ा दिन किल्लत है ,पर मेरे बेटे को बाप जैसा नहीं बनाना चाहती दीदी।अभी देखता तो सीखता ही। इसके वास्ते दूरी अच्छी । अब कोई किच किच नहीं।

आसानी से कमला कहकर काम में लग गई तभी निर्मला का ख्याल आया
एक वह जो पढ़ी लिखी और वर्किंग है वह समाज के डर से सब सह रही ही है, और एक कमला जो सिर्फ बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए अपने आदमी से अलग हो गई ।

आखिर समझदार कौन?
ये सवाल मैं आप पर छोड़ती हूं। आखिर क्यों सिर्फ समाज के लिए औरतें हर तरह का शोषण सह रही है यह जीवन अपने लिए मिला है इसे दूसरों के डर के कारण बर्बाद करने का हक हमें नहीं है।
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