साडी नारी का गहना

साडी नारी का गहना

साड़ी का फैशन कभी पुराना नहीं होता और इसीलिए साड़ी हमेशा से इंडियन वॉरड्रोब का हिस्सा रही है। महिलाएं पुराने वक्त से साड़ी पहनती आई हैं। माना जाता है करीब 5000 साल पहले इसकी खोज हुई। भारत की महिलाओं का यह सबसे पसंदीदा परिधान है। यदि हम साड़ी पहनने की बात करें तो इसे पहनने के 50 तरीके हैं।

बीते कुछ सालों में साड़ी कुछ ज्यादा ही फैशन ट्रेंड्स में है। नई स्टाइल्स, बॉलिवुड का असर और फैशनशोज में भी इसे जगह मिली है। साड़ी पहनने में काफी कंफर्टेबल है और इससे पहनना भी काफी आसान है, इसे देखते हुए महिलाएं इसमें तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट्स कर रही हैं।

अगर आप वर्किंग वुमन हैं, जिसे फॉर्मल तरीके से साड़ी पहननी है तो आपके लिए कुछ बेहतरीन स्टाइल्स भी हैं। गर्मी हो या सर्दी, आप हर सीजन में साड़ी पहन सकती हैं। साड़ी पहनने का सबसे अच्छा तरीका है इसे बेल्ट के साथ पहनें। ऐसा करने से आपका पल्लू पूरे दिन एक ही जगह पर रहेगा।

जिन लोगों को प्लीट्स बनाने में दिक्कत आती है वे स्टिच्ड साड़ी पहन सकती हैं। इस तरह से आपको साड़ी की फिक्र की जरूरत नहीं पड़ेगी।

साड़ी को और फॉर्मल लुक देने के लिए आप इस पर रेग्युलर ब्लैजर पहन सकती हैं। इसके साथ कॉन्ट्रास्टिंग शेड चुनें। आप पल्लू ब्लैजर के ऊपर या अंदर पहन सकती हैं।

फूड से लेकर साड़ियों तक हो गई है। इन दिनों ऑर्गैनिक साड़ी का क्रेज काफी बढ़ गया है और जवां से लेकर मध्यम उम्र की महिलाएं तक इसे पहनना पसंद कर रही हैं। खास बात ये है कि इन साड़ियों को उस कपास से तैयार किया जा रहा है, जिसमें किसी तरह के केमिकल फर्टिलाइजर का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।


क्या है ऑर्गैनिक साड़ी ?

इन दिनों ऑर्गैनिक साड़ी का क्रेज बढ़ रहा है। ऑर्गैनिक का मतलब है पहले जमीन को ऑर्गैनिक तरीके से तैयार करना। 3 साल तक उसे नैचरल खाद से उपजाऊ बनाया जाता है। जब यहां कपास उगती है, तो वह ऑर्गैनिक हो जाती है। फिर इसी से साड़ी तैयार की जाती है, जो ऑर्गैनिक साड़ी कहलाती है। इन्हें पहनकर आप जमीं से एक अलग ही जुड़ाव और निकटता महसूस करती हैं। इनके डिजाइंस इतने खूबसूरत होते हैं कि आप देखती रह जाएंगी।

केमिकल नहीं, नैचरल

जब कॉटन को ऑर्गैनिक तरीके से उगाया जाता है, तो इनसे बनने वाले कपड़े भी ऑर्गैनिक होते हैं। इन्हें डाई करते वक्त केमिकल फ्री, नैचरल और वेजिटेबल रंगों का इस्तेमाल होता है। ये रंग फूलों, पत्तियों और बीज से बनाए जाते हैं। ऐेसे में ये साड़ी नॉन एलर्जिक और नॉन टॉक्सिक होती हैं। ऑर्गैनिक साड़ियों के प्रॉडक्शन से जुड़ी कंपनी एथिकस की को-फाउंडर और क्रिएटिव डायरेक्टर विजयलक्ष्मी नायर बताती हैं, ‘कॉटन की साड़ी में आयरन और स्टार्च मुश्किल से होता है।

इसी वजह से हमने ऐसा टेक्सचर बनाया कि साड़ी बंधने पर कड़ी न होकर शिफॉन या जॉर्जट की तरह लुक दे। इनके रंग पक्के होते हैं और स्टार्च की जरूरत नहीं होती। इसे मेंटेन करना आसान है। इनके डिजाइंस में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि ये आजकल की आधुनिक महिलाओं के टेस्ट के हिसाब से हों। इनकी कीमत 4 हजार से शुरू होकर 40 हजार तक हैं। हम हर साल 2 क्लेक्शन भी लेकर आते हैं, जिनसे सब इनसे रूबरू हो पाएं।

हाल ही में ‘मुंबई मेरी जान’कलेक्शन लॉन्च हुआ, जिसकी प्रेरणा मुंबई शहर से मिली थी। इसमें विक्टोरिया टर्मिनल, बॉलिवुड, गेटवे ऑफ इंडिया, लोकल ट्रेन, वन बेडरूम चॉल जैसी आइकॉनिक डिजाइंस हैं।’वर्किंग वुमन, डॉक्टर, टीवी प्रजेंटर, लॉयर्स, टीचर्स वगैरह इसे काफी पहन रही हैं। स्कूल टीचर अनामिका मिश्रा बताती हैं कि तीज पर उन्होंने साड़ी खरीदी, तो स्टोन या एम्ब्रॉयडरी वाली न लेकर ऑर्गेनिक साड़ी खरीदी।

डा राजमती पोखरना सुराना भीलवाड़ा राजस्थान 

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