ससुराल का पहला दिन और घुटन

तृप्ति के सारे मेडिकल टेस्टों की रिपोर्ट आ चुकी थी।टाइफाइड निकला था।तृप्ति के मम्मी पापा के तो हाथ पाँव ही फूल गए थे।डॉक्टर ने कहा -"आप लोग परेशान न हों।कुछ दिन इन्हें रेस्ट करना पढ़ेगा बस"। टेंशन टाइफाइड का नहीं था, पाँच दिन बाद तृप्ति की शादी थी तो ये टेंशन जायज़ ही था।

ससुराल का पहला दिन और घुटन

तृप्ति के सारे मेडिकल टेस्टों की रिपोर्ट आ चुकी थी।टाइफाइड निकला था।तृप्ति के मम्मी पापा के तो हाथ पाँव ही फूल गए थे।डॉक्टर ने कहा -"आप लोग परेशान न हों।कुछ दिन इन्हें रेस्ट करना पढ़ेगा बस"। टेंशन टाइफाइड का नहीं था, पाँच दिन बाद तृप्ति की शादी थी तो ये टेंशन जायज़ ही था।

घर पर आकर सबसे पहले फोन तृप्ति के ससुराल में किया गया।उन्होंने  बड़े ही सुलझे स्वर में कहा -"आप बस हमारी बहु का ध्यान रखिये।बहुत साधारण तरीके से ये विवाह करेंगे।उसके बाद सारी ध्यान रखने की ज़िम्मेदारी हमारी हैं।हम सुधीर को लेकर अपनी तुरन्त अपनी बहु से मिलने आते हैं"।और शाम तक वे लोग तृप्ति से मिलने आते हैं।सुधीर भी तृप्ति से मिलता है।वैसे ये उनकी आज तीसरी मुलाक़ात थी।

सुधीर बहुत ही कम बोलता था और थोड़ा शर्मिला भी था।बस इतना ही भर कहा कि -"आप अपना ख्याल रखियेगा"।सास ससुर तो जैसे उसके अपने माँ पापा हो बोले-"कोई टेंशन मत लेना ।अब तुम हमारी बिटिया हो बस अपना ख्याल रखना"।आज शादी का दिन भी आ गया था।तृप्ति का जरूरत से ज्यादा ध्यान रखा जा रहा था।और वो पहले से अच्छा महसूस कर रही थी।बस थोड़ी कमज़ोरी थी।विवाह बड़े ही सादगी से सम्पन्न हुआ।और वो ससुराल आ गयी।

वहाँ भी पार्टी में वो मण्डप पर  सुधीर संग बैठी थी और बहुत सुन्दर लग रही थी। पार्टी अपनी चरम सीमा में थी।तृप्ति की सास ने कहा-"बेटा पार्टी तो रात भर चलेगी पर तुमने काफी साथ दिया अब तुम खाना खा लो और रेस्ट करो"। और तृप्ति को उसके कमरे में ले गयी।तृप्ति ने लहंगा और जेवर हटा कर नाइटी पहन ली और खाना खा के बिस्तर पर लेट गयी और उसे नींद भी आ गयी।

अचानक उसे लगा की कोई उसका शरीर सहला रहा है।तो देखा सुधीर थे।तृप्ति से बोले -"कैसी हो,तुम तो पहले से ही चेंज करके लेटी हो"।तृप्ति का सर दर्द से फट रहा था,उसने कहा -"नहीं उस कारण नहीं सर दर्द कर रहा था तो कपड़े चेंज कर लिए"।अब सुधीर उस पर हावी होने लगा ।और वह मिन्नतें करती रह गयी पर सुधीर जिसे वो सीधा समझ रही थी उसने उसकी एक न सुनी और फिर ..उसके शरीर के साथ उसकी आत्मा का भी बलात्कार हो गया।

सुबह तक पूरा बदन फिर से बुखार से दमक गया।और उसकी हालत और खराब हो गयी।सुबह सासू माँ आई और उसे बुखार में तड़पता देखकर समझ गई कि रात इसके साथ क्या हुआ है।और बहु का पक्ष लेकर ये निर्णय लिया कि जब तक बहु पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती तब तक उसके कमरें में ही रहेगी।सुधीर का ये व्यवहार तृप्ति को कचोटता रहा कि सिर्फ कुछ दिनों की ही तो बात थी।तो सुधीर अपने को कंट्रोल क्यों नहीं कर पाया ?और सम्बन्ध जब बिना मर्ज़ी के एकतरफ़ा बनाये जाते हैं तो वो बलात्कार ही तो होता है।और उसका बलात्कार तो उसके ही पति ने किया है।

क्या उसे न्याय मिलेगा या फिर वो यूँ ही घुट घुट के जियेगी।किसी से इसे शेयर भी नहीं कर सकती ।बस इस दर्दनाक हादसे को दिल में ही उसे दफन करना होगा क्या?दोस्तों ऐसा तृप्ति के ही नहीं बहुत सी लड़कियों के साथ होता है।और वो इसे कभी किसी से शेयर भी नहीं कर पाती है।हर सास तृप्ति की सास की तरह नहीं होती जो बहु का दर्द समझ सके।पुरुष की तरह महिलाओं की भी कामेच्छा होती हैं।प्रथम मिलन एक नए रिश्ते की शुरुवात करता है।और ये आजीवन हम सभी का यादगार दिन बन जाता है।अच्छी यादों के साथ ही इस दिन को जीना चाहिए।जोर जबरदस्ती से नहीं।

ये ब्लॉग आपको कैसा लगा।जरूर बताइयेगा।

धन्यवाद ।आपकी स्नेह

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