संत रविदास के अनमोल विचार जैसे कठौती में गंगा

संत रविदास के अनमोल विचार जैसे कठौती में गंगा

संत रविदास का जन्म हिन्दू कैलेंडर के आधार पर माघ माह  की पूर्णिमा तिथि को हुआ था, इसलिए हर साल माघ पूर्णिमा  को रविदास जयंती मनाते हैं।

आज समरसता व सद्भाव के प्रतीक पूजनीय संत श्री रविदास जी की जयंती है 

उन्होंने अपने विचारों व रचनाओं से समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत कर मानवजाति के कल्याण का मार्ग दिखाया।

संत रविदास जी ईश्वर की भक्ति पर पूर्ण विश्वास करते थे। उनके वाणी की मधुरता और ज्ञान से सभी लोग प्रभावित होते हैं। उनके द्वारा कहे शब्द, दोहे, पद और अनमोल वचन (विचार) आज भी हम सभी को सदैव आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आइयें जानते हैं संत रविदास जी के कुछ अनमोल विचार...

*व्यक्ति पद या जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता है, वह गुणों या कर्मों से बड़ा या छोटा होता है।

*भगवान उस ह्रदय में निवास करते हैं जिसके मन में किसी के प्रति बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है।

*हमें हमेशा कर्म में लगे रहना चाहिए और कभी भी कर्म के बदले मिलने वाले फल की आशा नही छोड़नी चाहिए क्‍योंकि कर्म करना हमारा धर्म है तो फल पाना हमारा सौभाग्य है।

*यदि आपमें थोड़ा सा भी अभिमान नही है तो निश्चित ही आपका जीवन सफल रहता है ठीक वैसे ही जैसे एक विशालकाय हाथी शक्कर के दानो को बिन नही सकता लेकिन एक तुच्छ सी दिखने वाली चींटी शक्कर के दानों को आसानी से बीन लेती है। 

*संत रविदास ने दुराचार,अधिक धन का संचय, अनैतिकता और मांसाहार को गलत बताया है. उन्होंने अंधविश्वास, भेदभाव, मानसिक संकीर्णता को समाज विरोधी बताया है।

*वे अपने संदेशों में कहते हैं कि हम सभी यह सोचते हैं कि संसार सबकुछ है, मगर यह बिल्कुल सत्य नहीं है. परमात्मा ही सत्य है।

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