क्या आप जानते है एक चुटकी सिन्दूर की कीमत?

क्या आप जानते है एक चुटकी सिन्दूर की कीमत?

एक चुटकी सिंदूर की कीमत जानते हो क्या
ईश्वर का आशीर्वाद होता है एक चुटकी सिंदूर
सुहागन के सर का ताज होता है एक चुटकी सिंदूर
हर औरत का ख्वाब होता है एक चुटकी सिंदूर

जी हां हर भारतीय विवाहिता स्त्री के लिए सिंदूर बहुत महत्वपूर्ण है। शादी के दिन एक लड़की चाहे कितनी भी गहने, कपड़ों से लदी हो पर जब तक एक चुटकी सिंदूर दूल्हा-दुल्हन की  मांग में नहीं भरता तब तक शादी पूरी नहीं मानी जाती, सिंदूर के बिना शादी की कल्पना नहीं की जा सकती।

हमारे यहां सुहागन स्त्रियां सिंदूर को भगवान से भी ऊंचा स्थान देती है। चुटकी भर सिंदूर की कीमत सच में एक विवाहिता स्त्री ही समझ सकती है। सुहागन के सोलह श्रृंगार में से एक सिंदूर उसके अखंड सुहागन होने का प्रतीक है ।चाहे कोई हिंदू रानी, महारानी, देवी,सीएम या डीएम हो या फिर गृह लक्ष्मी हर विवाहित औरत शान के साथ सिंदूर लगाती है।

कहते हैं सिर सबसे ऊंचा होता है इसी वजह से सिंदूर को वहां पर लगाया जाता है ।इसलिए एक विवाहिता के लिए सिंदूर का दर्जा ताज से भी ऊंचा होता है। इस ताज के बिना औरतों का श्रगार अधूरा होता है।हिंदू धर्म में मांग भरना केवल एक परंपरा नहीं है इसके पीछे एक वैज्ञानिक रहस्य छिपा है।

वैज्ञानिक कारण - सिंदूर में मर्करी  यानी पारा होता है जो अकेली ऐसी धातु है जो लिक्विड के रूप में पाई जाती है, सिंदूर लगाने से शीतलता मिलती है और दिमाग तनाव मुक्त रहता है ।सिंदूर शादी के बाद लगाया जाता है क्योंकि यह रक्त संचार के साथ ही यौन क्षमता को बढ़ाने का काम करता है।
 

शरीर विज्ञान में भी सिंदूर का महत्त्व बताया गया है सिंदूर में पारा जैसी धातु अधिक होनेके कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़ती 
वैज्ञानिक आधार पर कहा जाता है जब किसी लड़की का विवाह होता है तो उस पर विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारी होती है जिनका प्रभाव सीधा उसके मस्तिष्क पर पड़ता है इस तनाव के कारण विवाह के पश्चात महिला विवाह के बाद  सिर में दर्द, अनिद्रा जैसी मस्तिष्क से जुड़े रोगों से ग्रस्त हो जाती है ।सिंदूर में मौजूद पारा मस्तिष्क के लिए लाभदायक है।

धार्मिक कारण-भारत में हर हिन्दू धर्म की महिला जो शादी शुदा जिन्दगी व्यतीत करती हो .वह हमेशा अपनी मांग में सिन्दूर लगाती है।आज कल के ज़माने में महिला भले ही छोटा लेकिन सिन्दूर ज़रूर लगाती है. यह पवित्र माना जाता है . जिसका उपयोग पूजा पाठ में भी करते है।

सिंदूर लगाने की प्रथा हिन्दू धर्म में बहुत समय से चली आ रही है. और इसका उल्लेख हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथो में भी मिलता है। लेकिन मुख्यतः इस परम्परा का सबसे ज्यादा चलन रामायण युग से मिलाता है।हिन्दू धर्म में रामायण की  बहुत लोकप्रिय गाथा रही है ।

इस कथा के अनुसार जब सीता माता ने अपनी मांग में सिंदूर लगाया था. तब हनुमान जी भी वह उपस्थित थे .उन्होंने सीता माता को जब सिंदूर लगाते देखा तो उनसे सिन्दूर को मांग में भरने का कारण पूछा. तब सीता माता ने कहा यह सिन्दूर भगवन श्री राम के लिए है ,यह सिंदूर उनकी प्रसन्नता के लिए है. और मांग में सिंदूर को लगाने से पती  की उम्र बढ़ती है .और पति-पत्नी का रिश्ता और भी मजबूत होता है । कहा जाता है पुरे राज्य में यह बात फैल गयी और सिंदूर को शुभ माना जाने लगा . और वहा से यह प्रथा और भी आगे बढ़ने लगी ।सिन्दूर सुहागन होना भी दर्शाता है इसलिए यह प्रथा को सभी लोगो ने सराहा . हिन्दू समाज में पति को परमेश्वर का दर्जा दिया गया है .इसलिए पति की प्रसन्नता और दीर्घायु के लिए भी सिन्दूर लगाया जाता है ।

कारण चाहे जो भी हो पर हिंदू विवाहित स्त्री का श्रृंगार सिंदूर के बिना अधूरा है।


अनु गुप्ता

What's Your Reaction?

like
1
dislike
0
love
2
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0